बिहार के मधुबनी जिले के हरलाखी विधान सभा क्षेत्र में जहां के विधायक जनता डाल यू के सुधांशु शेखर हैं उस क्षेत्र के महमदपुर गांव में होली के दिन एक ही परिवार के लोगों पर हमला हुए जिसमे 5 जिंदगियां खत्म हो गई। पीड़ित परिवार राजपूत समाज से आते हैं। उस घटना के तुरंत बाद ही सोशल मीडिया और नव सीखु youtuber पत्रकार एक खबर चलाने लगते हैं कि प्रवीण झा रावण सेना द्वारा राजपूत समाज के 5 लोगों की हत्या कर दी गई।
मामला अचानक राजनीतिक रंग देने लगता है और बाहरी सेनाओं , दलों और तमाम संगठन द्वारा इसे जातिगत रंग देने का प्रयास किया जाता है।
असल में मामला आपसी रंजिश का है और इसमें पीड़ित परिवार के गांव के राजपूत समाज से ही आने वाले भोला सिंह नाम के युवक का भी नाम आता है और उनके साथ 35 आरोपियों के नाम आते हैं जिसमे मुकेश साफी, मेहता, और भी कई नाम हैं जिसमें कुछ ब्राह्मण समाज के भी आरोपी का नाम आता है । कई सोशल नेटवर्किंग साइट पर सिर्फ और सिर्फ प्रवीण झा को मुख्य आरोपी बता कर टारगेट किया जाता है । प्रवीण झा ने अपने फेस बुक पर रावण की कुछ विचारों का समर्थन किया था उसे देख रावण सेना का प्रवीण झा द्वारा राजपूतों की हत्या का नेरेटिव फैलाया जाता है।
परिवार के ही अलग अलग लोगों के अलग अलग बयान होते हैं जो कई वीडियो में दिख रहा है।
किसी का कहना है मुख्य आरोपी भोला सिंह है कुछ लोग प्रवीण झा का नाम बताते है । अचानक राजनीतिक मोड़ तब आता है जब 4 दिन बाद परिवार के सदस्य द्वारा प्रवीण झा को बेनीपट्टी विधानसभा के बीजेपी विधायक विनोद नारायण झा के साथ संबंध होने का दावा किया जाता है और अचानक से सोशल नेटवर्किंग साइट पर यह खबर चलने लगती है कि रावण सेना का प्रवीण झा को भाजपा विधायक विनोद नारायण झा का संरक्षण प्राप्त है और उस पूरे घटना को भाजपा विधायक के क्षेत्र बेनीपट्टी से जोड़ दिया जाता है। कई दलों के नेता भी विनोद नारायण झा के नाम पर अपनी भूमिका स्पष्ट करते हैं कि उनका आचरण ऐसा नहीं है और ना ही उनका कोई संबंध है इस केस से।
अब जरा इस वीडियो को देखते हैं पीड़ित परिवार के परिजन क्या कह रहे हैं और इसमें किस तरह भोला सिंह का नाम ले रहे हैं और एक भारती और साफी का नाम ले रहे हैं कि गोली चल रही थी और उन्हें इनके द्वारा काटा जा रहा था।
अचानक से सोशल नेटवर्किंग साइट पर एक लहर चल पड़ती है कि करनी सेना अब मधुबनी रवाना हो रही है और जोश में उनके कई समर्थक उल जलूल बयानबाजी करने लगते हैं। कई लोग ब्राह्मण के खिलाफ एक सोची समझी रणनीति के तहत खबर चलाने लगते है पर इनको असलियत का क्या पता कि यह जातिगत मामला नहीं क्यूंकि हत्यारों में राजपूत, दलित भी सामिल है। करनी सेना के पुरोद्धा उपदेश राणा भी पहुंचते है इंसाफ की आवाज को बुलंद करने पर वो वहां पहुंच कर खुद समझ जाते हैं यह दो गुटों के बीच की लड़ाई थी जिसमे एक गुट का निहत्थे होने के कारण अचानक से दूसरे गुटों द्वारा सुनियोजित तरीके से हमला किया जाता है।

https://youtu.be/vO0HMWpoBjQ

ऊपर दिए गए वीडियो को पूरा देखें और नीचे दिए गए वीडियो को भी पूरा देखें।

कई स्रोतों से यह खबर आती है कि इनका पुराना मामला भी था जिसमे विवाद के कारण पीड़ित परिवार के सदस्य संजय सिंह SC ST ACT में सजा काट रहे हैं।
अब सवाल यह भी है आखिर कोई व्यक्ति बिना किसी हित के किसी पर sc st act का केस क्यूं करेगा और यह एक्ट एक ब्राह्मण तो लगा नहीं सकता है। यह कोई मूर्ख भी बता देगा आपको।
इसी बीच विनोद नारायण झा ने अपनी स्थिति स्पष्ट की उनका किसी आरोपी से कोई संबंध नहीं है।
बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी पहुंचते है और बार बार प्रवीण झा रावण सेना पर जोर देते हैं साथ में सभी आरोपी को सजा हो इसकी बात करते हैं पर नाम उनको सिर्फ प्रवीण झा का याद रहता है या बताया जाता है।
राजद का इतिहास पता ही होगा एक ब्राह्मण आडवाणी जी जब लालू यादव के राज मे राम मंदिर निर्माण के पक्ष में रथ यात्रा निकालते हैं तो लालू यादव आडवाणी जी को जेल में डाल देते हैं।
जरा राजनीति समझिए कि घटना किसी और विधान सभा क्षेत्र में होती है पर चर्चा दूसरे विधानसभा की होती है क्यूंकि वहां के विधायक झा हैं।
फरार आरोपियों के घर के कुर्की जप्ति का आदेश दिया जाता है पर सोशल मीडिया पर यही चलता है कोई घटिया मूवी की टाइटल की तरह की रावण की लंका ढह रही है यह अंत नहीं सुरूआत है जब आरोपी प्रवीण झा का घर तोड़ा जा रहा था। ठीक उसी तरह भोला सिंह या मुकेश साफी के घर का कोई वीडियो नहीं चलाया जाता है और ना ही कहा जाता है कि देखो जयचंद भोला सिंह का किला ढ़ह रहा या दलित समाज का मुकेश साफी का महल ढ़ह रहा।
आखिर ऐसा क्यों है और यह पत्रकारिता कर कौन रहा है वो क्यूं भोला सिंह और मुकेश साफी के किला ढाहने की बात नहीं करते हैं। हत्या भले ही जातिगत ना हो पर उसके बाद जो भी हो रहा है वह पूर्ण रूप से जातिगत है क्यूंकि सिर्फ और सिर्फ प्रवीण झा का नाम लेना और भोला सिंह , मुकेश साफी का उस तरह से नाम ना लेना यह जातिवाद ही तो है।
क्या मीडिया के खबर से आरोपी को सजा होगी या मामले को गंभीरता से जांचने के बाद।
हो सकता है प्रवीण झा ही मुख्य आरोपी हो और अन्य बुरहान वाणी की तरह भटके हुए नौजवान और उनके बचाव मे अदालत का दरवाज़ा रात को खोलना पड़े।
इस देश का इतिहास ही ऐसा रहा है।
निर्भया मामले को कौन भूल सकता है वह भी बिहार की बेटी थी। जिस आरोपी ने दरिंदगी की हद को पार किया वह नाबालिक नियमों के हिसाब से रिहा हो चुका है। विपक्षी एकता के सुरमा अरविंद केजरीवाल ने उसे उलटा सीलाई मशीन और कुछ पैसे दिए। पीड़िता के परिवार कुछ समर्थकों के साथ आंदोलन करना चाह रहे थे ताकि अफरोज को भी सजा हो पर कोई सेना नहीं आयी सामने ना ही ये राजनीतिक दल। नतीजा हुआ कि अरविंद केजरीवाल भारी बहुमत में सत्ता में आए। याद होगा निर्भया मामले के बाद ही अन्ना आंदोलन के नाम पर निर्भया के इंसाफ के लिए अरविंद केजरीवाल जी ने क्या क्या पैंतरे किए थे और मुख्यमंत्री बनने के बाद निर्भया के आरोपी अफरोज के लिए उनकी सहानुभूति रही।
मुझे तो लिखने में भी संकोच होता है क्योंकि हमारे देश मे अभिव्यक्ति की आजादी का भी तो मतलब नहीं पता । एक शायर उर्दू बोल कर सुप्रीम कोर्ट का भी अवमानना करता है तो ताली बजती है और हम ब्राह्मण अपनी बात भी खुल के कहें तो क्या क्या नाम दिए जाते हैं।
नक्सली संगठन देश के जवानों को रोज मारते रहते हैं और उसी के बचाव में तमाम संगठन , राजनीतिक दल दलील देते हैं कि नक्सली क्या करे गरीबी है, खाने को कुछ है नहीं उनके पास वो मजबूरन हथियार उठाते हैं।
ब्राह्मण समाज के प्रवीण झा अपराधी है तो फांसी दो और अन्य जाति के अपराधियों को भी फांसी हो पर जो राजनीतक लोगों ने ब्राह्मण समाज या सवर्ण के साथ अन्याय किया है चाहे कोई योजना हो सरकारी नौकरी हो, महामारी हो ,राजनीतिक हिस्सेदारी हो, मानव कल्याण के कार्य हों ब्राह्मणों को किनारा ही किया जा रहा है।
चिंतन और मंथन का दौर है।

जय सनातन।
जय श्री राम।

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