कल वरिष्ठ पत्रकार अर्णब गोस्वामी को गिरफ्तार कर लिया गया। और गिरफ्तार क्या, बाल पकड़ कर धक्के मारते हुए अपराधियो की गाड़ी में बिठाया और थाने में भी उनके साथ मारपीट हुई।जब एक वरिष्ठ राष्ट्रवादी पत्रकार के साथ ये हो गया, तो सामान्य राष्ट्रवादी इंसान की क्या ही हैसियत?

अब सवाल ये आता है कि भाजपा क्या कर रही? कल से बस ट्विटर ट्विटर खेला जा रहा। एक राष्ट्रवादी पत्रकार का ये हाल है गया सबके सामने, क्यों नहीं ये कुछ कर पाए? खुद केंद्र में आके एनडीटीवी , प्रिंट, और वायर जैसे पत्रकारों को हाथ तो क्या उनका चैनल पे करवाई तक ना कर पाए? और राष्ट्रवादी पत्रकार को तक ना बचा पाए।अगर यही कोई वामपंथी पत्रकार होता ना तो अबतक रोड जाम हो गया होता । सुप्रीम कोर्ट तक से जमानत कि अर्जी लग चुकी होती।

यहां तो बस वरिष्ठ नेताओ का ट्वीट ट्वीट चल रहा??सिर्फ इसी मामले में नहीं, कमलेश तिवारी , निकिता, लव जिहाद या खुद के कार्यकर्ताओं को हत्या तक पे आजतक भाजपा से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया।अब समय आ गया है कि भाजपा को अपनी नीतियों में बदलाव करना पड़ेगा।

जिस तरीके से हत्या, अत्याचार हिंदूवादी लोगो पे हो रहा, अगर यही चलता रहेगा तो विकास का क्या अर्थ? हिन्दू ही नहीं बचेगा तो मंदिर का क्या अर्थ? और अगर आज अर्णब गोस्वामी जी की मदद नहीं की गई तो भविष्य में कोई भी पत्रकार हिन्दुओं के लिए इतना मजबूत आवाज़ कभी नहीं उठाएगा।

फ्रांस एक हत्या में जाग जाता है । वहां के राष्ट्रपति खुद उस व्यक्ति को आखिरी यात्रा में जाते हैं। यहां तो खैर………..

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