अभी इस बीच ना जाने कितने लव जिहाद के केस सामने आए। किसी में लड़की की लाश सूटकेस में मिल रही तो किसी में लड़की खुद अपना वीडियो बना रही। हिन्दू धर्म और समाज का मज़ाक उड़ाते ये सब वीडियो इसी लॉकडाउन में ज़्यादा देखे गए।

वैसे लव जिहाद बहुत पहले से होता आ रहा। कोई आज कि बात नहीं है। लेकिन मैंने देखा है कि जब भी ऐसा केस आता है तो लोग सीधे सीधे लड़कियों को अपशब्द कह के आगे बढ़ जाते हैं। मतलब ना कोई चर्चा ना कुछ, की क्यों हो रहा, कैसे रोका जा सकता है? बस कुछ गालियां दो और आगे बढ़ो।

सबसे पहले तो ये जानना पड़ेगा कि लव जिहाद इतना बढ़ कैसे रहा है

1. बॉलीवुड – बॉलीवुड ने हमेशा से एक नेक मुस्लिम हीरो दिखाया जो हमेशा एक हिन्दू युवती से ही प्यार में होता है । दोनों घर से भाग के है शादी करते हैं और बहुत सुखी रहते हैं। करीब 50 साल से ऐसे ही फिल्म बनी। किसी ने विरोध क्यों नहीं किया?

2. शिक्षा नीति – हमारे देश में एक सोच बन गई है कि जिसको अंग्रेजी आती है वहीं पढ़ा लिखा ‘ स्मार्ट ‘ है। नतीजन सारे माता पिता अपने बच्चों को ‘ मिशनरी स्कूल ‘ में दाखिले के लिए ही सारा सामर्थ लगा दिए। और आप सबको पता होगा की मिशनरी स्कूल में तिलक, कलावा, राखी सब पहनना भी अपराध है। सुबह शाम यीशु मसीह की पूजा होती है। या तो बच्चा इशु का भक्त बन जाता है नहीं तो हिन्दू धर्म से दूर चला ही जाता है। इसपर बात क्यों नहीं हुई?

3. माता – पिता और संस्कार  – माता पिता ने कभी बच्चो को संस्कार क्यों नहीं दिए? सुबह से शाम तक ऐसा भी क्या काम था कि एक बार भी बच्चे पे ध्यान नहीं गया? वो कहां जाता है, किससे मिलता है इसकी जानकारी भी क्या भाजपा सरकार रखेगी? राजनीति तुष्टिकरण की वजह से सबने मुसलमानो से प्रेम दिखाया, आपस में क्यों नहीं दिखाया?। अपने पुजारियों का, मंदिरों का , भगवानों का मज़ाक बनाया। पीके मूवी हिन्दुओं ने ही हिट करवाई थी।

जब भी आप अपने धर्म के पुजारियों का, या मंदिरों का मज़ाक बनाते हैं ना तब आप अपने बच्चो में ‘ हीन भावना ‘ पैदा करते हैं। इसी हीन भावना की वजह से बच्चे को अपना धर्म छोड़ बाकी सारा धर्म अच्छा लगता है। ऐसे लोग ही इस्लाम या ईसाई से जल्द आकर्षित होते है।

लव जिहाद जो हो रहा उसमें क्या समाज की लापवाही नहीं है? देखिए गाली देने का कोई अर्थ नहीं है। जिनको मरना था मर गई, जिनको भोगना है वो भोग रही। और अभी पता नहीं क्या क्या होगा। ऊपर लिखी तीनों बातो पर चर्चा करके की इसको काबू में लाया जा सकता है। गाली देके आप अपने आप को संतुष्ट कर सकते हैं लेकिन सामाजिक तौर पर ये हमारी हार है इस सच्चाई से आप भाग नहीं सकते।

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