एक बार एक लड़का कुछ समान लेने बाहर गया। वो बाइक से जा रहा था कि अचानक उसकी गाड़ी के आगे एक गुंडे ( अल्पसंख्यक ) की गाड़ी रुक गई। ब्रेक मारते मारते तक भी उसकी बाइक टकरा गई। फिर क्या था गुंडे उतरे और लड़के को बेहिसाब मारा। जब लड़का थाना में रिपोर्ट करवाने गया तब रिपोर्ट तो हुई नहीं उल्टा पुलिस वाले भी गुंडे के दबाव में आके उस लड़के को बहुत मारे।

एक लड़की स्कूल जाती थी। उसके पीछे कुछ जिहादी बहुत दिनों से पड़े थे। उसपर छींटाकशी करते, घूरते, गंदे गंदे इशारे करते। एक बार स्कूल के बाद उस लड़की के पीछे जिहादी पड़ गए। लड़की ने विरोध किया तो जिहादियों ने उसके थप्पड़ मार दिया। लड़की रोते हुए अपने भाई को बुलाई। तो जिहादियों ने अपनी बस्ती से दस गाड़ी भर के गुंडे बुलवा दिए। खूब पिटाई हुई उसके भाई की। जब थाने रिपोर्ट लिखवाने गए तो ‘ सरकार ‘ के दबाव में आके रिपोर्ट लिखने से मना कर दिया । अब लड़की मजबूरन उस जिहादी के साथ घूमती थी जो कुछ साल के बाद लड़की को छोड़ भी दिया था।

ये कोई मनगढ़ंत कहानी नहीं। ये उत्तर प्रदेश के हर जिले का हाल हुआ करता था जब प्रदेश में बीस साल सपा – बसपा का शासन था। हर ज़िले में यही कांड होता था। असल में सपा बसपा का पांच पांच साल का समय बंधा हुआ था। दलित – मुस्लिम के वोट बैंक से बसपा सत्ता में आती थी तो यादव – मुस्लिम वोट बैंक से सपा। अब जाहिर सी बात है जिन लोगो को दोनों के शासन काल में सबसे ज़्यादा महत्व दिया जाए उनकी क्यों ना गुंडई बढ़े।

पूरे बीस साल उत्तर प्रदेश के यही हाल रहा। फिर आती है योगी सरकार जो काफी हद तक लगाम लगाती है। चाहे गुंडे हो या महिलाओं की सुरक्षा हो, सब पर बहुत शीघ्र निर्णय लिया जाता है। इसी वजह से आज उत्तर प्रदेश अब पहले जैसा नहीं रहा। कानून का राज है । भाजपा के कार्य के बाद भाजपा का हर बार जीतना भी निश्चित है ।

पर समस्या तब हुई जब मिर्ज़ापुर जैसी वेब सीरीज बनाई गई। जिसमे ब्राह्मण समाज को ऐसा दिखाया गया कि जैसे पूरे उत्तर प्रदेश में गुंडई इन्हीं की हो। यार सच में?? बीस साल का इतिहास नहीं पता आपको? इतने बड़े गुंडे जो समुदाय विशेष के थे ,या जो सरकार थी उसी जाति के गुंडे उनका सारा काम इन वेब सीरीज वालो ने ब्राह्मणों पर  मढ़ दिया।

जब आज से दस बारह साल बाद जब उत्तर प्रदेश में क्राइम रेट बिल्कुल  कम हो जाएगा, जब याद किया जाएगा कि उत्तर प्रदेश में किसकी गुंडई हुआ करती थी तब मिर्ज़ापुर वेब सीरीज का नाम लेके सारा आरोप ब्राह्मणों पर लगा दिया जाएगा। आज के बच्चे जो मिर्ज़ापुर देख रहे उन्हे तो यही लगेगा का ना की ब्राह्मण समाज की गुंडई है। बारह साल बाद जब यही बड़े हो जाएंगे तो उन्हे यही लगेगा कि उत्तर प्रदेश का ये हाल त्रिपाठी, शुक्ला, पंडित ने किया था। अगर उनको सच्चाई पता भी चल गई तो भी उनके उस कोरे कागज वाले दिमाग में पड़ी छाप को तो नहीं मिटा पाएंगे ना?

बीस साल जिन लोगो ने जी भर कर कांड किया, उन्हे मिर्ज़ापुर के माध्यम से क्लीन चिट मिल गई और आने वाली पीढ़ी की नजर में ब्राह्मण बदनाम हो गया। उसके बाद भी कुछ लोग है जो आजतक इस सीरीज की तारीफ कर रहे!!!

हिन्दुओं को इस एजेंडा को समझना चाहिए और बहिष्कार तथा ओटीटी सेंसरशिप का समर्थन करना चाहिए। रॉ और एडल्ट कंटेंट के चक्कर में इतिहास बदल दिया जाएगा ना तो अपनी अगली पीढ़ी को आप समझा नहीं पाएंगे।  एजेंडे की लड़ाई समझिए। हर समय सरकार के खिलाफ बोलने का कोई अर्थ नहीं।

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