असम में जब से हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य की बागडोर बतौर मुख्यमंत्री संभाली है हर दिन सूबे में कुछ न कुछ बड़ा हो रहा है, जिसकी तारीफ सिर्फ असम में ही नहीं बल्कि देश के अलग-अलग जगहों मे भी हो रही है, इसी कड़ी में एक बार फिर हिमंता सरकार के सख्तपूर्ण रवैये का असर दिखने लगा है, सवाल ये उठ रहा है कि क्या असम में हिमंता सरकार के सख्तपूर्ण रवैये से डर गया है उल्फा, ये सवाल इसलिए भी उठ रहा है क्योंकि इस गणतंत्र दिवस पर पहली बार असम स्वतंत्र रूप से गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है। दशकों से पूर्वोत्तर भारत में, खास तौर से असम में गणतंत्र दिवस घर पर बैठकर मनाया जाता था, क्योंकि लोग अपने घरों से बाहर निकलने में डरते थे। क्योंकि बाहर निकलने पर उनकी जान को खतरा होता था, लेकिन जब से बीजेपी सत्ता में आई है,  बीजेपी ने उल्फा जैसे संगठनों पर लगाम लगाना शुरू कर दिया है ।

दरअसल, यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम उर्फ ULFA इंडिपेंडेंट ने इस बार के गणतंत्र दिवस पर बंद नहीं बुलाने का फैसला किया है। संगठन ने 26 जनवरी को कोई सशस्त्र विरोध प्रदर्शन नहीं करने का भी फैसला किया है। असम के मुख्यमंत्री ने रविवार को ट्वीट करते हुए इसकी जानकारी दी ..हिमंता बिस्वा सरमा ने ट्वीट किया, “मैं उल्फा के गणतंत्र दिवस के दौरान बंद का आह्वान नहीं करने और किसी भी प्रतिरोध से दूर रहने के फैसले का स्वागत करता हूं। मैं इस अवसर पर एक बार फिर श्री परेश बरुआ से भारत सरकार के साथ सार्थक चर्चा के लिए आगे आने की अपील करता हूं।”

वहीं मीडिया को भेजे गए एक बयान में बरुआ ने कहा कि उल्फा (आई) कोविड-19 की स्थिति के मद्देनजर बंद का आह्वान नहीं करेगा, या गणतंत्र दिवस समारोह का बहिष्कार नहीं करेगा। बरुआ ने कहा कि लोगों को महामारी के कारण समारोह में भाग लेने से बचना चाहिए।

दरअसल असम सरकार इस समय पूरी सख्ती के साथ उल्फा उग्रवादियों से निपट रही है, ऐसे में सरकार के खिलाफ जाना उसके लिए खतरनाक साबित हो सकता है. देखा जाए तो जब से हिमंता सरकार सत्ता में आयी है तब से कांग्रेस शासन के दौरान राज्य में अराजकता फैलाने वाले उल्फा थोड़ी शांत जरुर पड़ गयी है .

हाल ही में सीएम हिमंता ने कहा था कि “अपराधी यदि भागने की कोशिश करता है, तो उसे पकड़ने के लिए एनकाउंटर किया जाए। यदि क्रिमिनल पुलिस के हथियारों तक को छीनता है, तो उसका एनकाउंटर करना सही पैटर्न माना जाएगा।” सरकार के ऐसे रवैये से उल्फा भी डरा है। बता दें कि साल 2009 और 2018 के बीच, ULFA के पूरे नेतृत्व को पकड़ लिया गया या सरकार के सामने आत्मसमर्पण करा दिया गया.आज केवल एक बटालियन सक्रिय है. वर्तमान में परेश बरुआ के अलावा उल्फा के पास कोई कमांडर नहीं है। वैसे ये तो कहना पड़ेगा वाकई जब से हिमंता सरकार ने सत्ता संभाली है असम की आबोहवा बदल सी गई है ।

 

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