एक ऐसा विषय जिसपर आज से 7 – 8 साल पहले तक कोई खुल के बात नही करता था, जो लोग गाहे बगाहे आवाज़ उठाते भी थे उन्हें प्यार का दुश्मन, संकीर्ण मानसिकता वाले लोग और न जाने क्या क्या कहा जाता था, हम लव जिहाद को जबतक समझ पाते तब तक न जाने कितनी बच्चियों को इसने लील लिया, आज परिस्थिति वो आ गई कि इसके खिलाफ कानून बनाने की नौबत आ गई, कम गंभीर समझे जाने वाले इस षड्यंत्र को आइये समझने का प्रयास करते हैं, आइये जानते हैं इसे कैसे अंजाम दिया जाता है।

उद्देश्य

लव जिहाद का उद्देश्य, हिन्दू लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाना और उनका निकाह के ज़रिए धर्मपरिवर्तन करवाना और मुसलमान बच्चे पैदा करना है। एक हिन्दू लड़की को धर्मांतरित किये जाने पर उस से कई मुसलमान बच्चे पैदा किये जा सकते हैं, अतः व्यापक रूप से देखा जाए तो आपने न केवल एक हिन्दू को मुसलमान बनाया बल्कि कम से कम 2 हिन्दू पैदा होने से भी रोक दिया।

षड्यंत्र

लव जिहाद के लिए तैयारी किस स्तर पर की जाती है उसका पता इस से चलता है कि हर हिन्दू परिवार का उसकी जाति और सामाजिक रुतबे के हिसाब से इनाम का दाम तय होता है, लड़की ब्रम्हणों की हो तो अलग इनाम राशि, बनियों की हो तो अलग और शूद्रों या क्षत्रियों की हो तो अलग इनाम की राशि तय की जाती है, आपके आस पास खुली नाई की दुकानें, मोबाइल रिचार्ज की दुकानें और अन्य छोटे कामों में संलिप्त लोग आपकी घर से आने जाने वाली बच्चियों का डेटा इकट्ठा करते हैं। जिस दिन कोई बच्ची फोन रिचार्ज करवाने गई उसका नंबर लीक किया जाता है, आपके बच्चों की कोचिंग में, स्कूल में, अध्यापक के रूप में, विद्यार्थी के रूप में वो हर जगह होते हैं, अपना नाम बदल कर बताते हैं और प्रायः गुड्डू, राज, राहुल, सन्नी, समीर, सोनू इत्यादि नाम बताकर पहचान बढ़ाते हैं, यदि आपकी बेटी की सहेली कोई मुस्लिम लड़की है तो उसके लव जिहाद में फंसने की संभावना और अधिक होती है। एक हिन्दू लड़की के पीछे जाने वाले मुस्लिम लड़के का पूरा ग्रुप होता है जिसमे कई आपराधिक छवि के मुस्लिम लड़के उस लव जिहादी को सहायता देते हैं, बल्कि ये सुनिश्चित करते हैं कि कोई और हिन्दू लड़का उस लड़की के इर्द गिर्द न पहुंचे, हिन्दू लड़की के पीछे पड़े लड़के को आर्थिक मदद दी जाती है। कितनी? आपकी कल्पना से कहीं अधिक, महंगे उपहार, महंगी मोटरसाइकिल, ब्रांडेड कपड़े इत्यादि की व्यवस्था की जाती है। कानूनी सहायता के लिए वकील भी मुहैया करवाए जाते हैं।

ये सब प्लानिंग आपके अपने क्षेत्र के मदरसों में की जाती है, शुक्रवार की नमाज़ के बाद बैठने वाली जमात में इस सब की प्लानिंग होती है और सबकुछ तय किया जाता है।

क्रियान्वयन

लड़की चुन लेने के बाद उसकी सहायता के ज़रिए उसके निकट जाया जाता है, एक दूसरे को नंबर दिए जाते हैं उसके बाद शुरू होता है उपहारों का सिलसिला, उस लड़की को स्पेशल फील करवाने के लिए उसकी छोटी से छोटी बात नोट की जाती है, जन्मदिन खास बनाया जाता है और उसे बाकी दोस्तों से अलग कर दिया जाता है, फिल्मों में ऐसी बहुत सी सामग्री होती है जिनका इस्तेमाल किया जाता है और किया भी क्यों न जाये, वहां इनके आदर्श जो बैठे हैं, शाहरुख, आमिर, सैफ इन सब ने लव जिहाद ही तो किया है। फिल्मों में वैसे भी मुसलमान पात्र को ईमान का पक्का, मददगार, वफादार, दोस्ती पर जान देने वाला दिखाया जाता है, खैर वापस मुद्दे पर आते हैं, लड़की के जाल में फंसने के बाद कोर्ट में बैठा मुसलमान वकील इनकी शादी करवा देता है, एहतियातन लिखित या वीडियो के माध्यम से लड़की का बयान लिया जाता है की लड़की ये शादी अपनी मर्ज़ी से कर रही है, पुलिस केस की नौबत आने पर ये बयान इनका ब्रम्हास्त्र सिद्ध होता है, लड़की इनके जाल में फंसकर इनके साथ चली जाती है जिसे बच्चा पैदा करने की मशीन बना दिया जाता है, जो आवाज़ उठाती है उसकी लाश नाले में, बोरी में या सूटकेस में मिलती है। अनेक मामलों में तो अंग निकालकर बेचने या दुबई जैसे देशों में बेच देने के मामले भी सामने आए हैं।

आपकी बच्ची इनके लिए वैसे भी काफ़िर है जिसे मारने का हुक्म आज से 1400 साल पहले क़ुरान के ज़रिए दिया जा चुका है, अतः कानून में भले ये हत्या अपराध हो पर शरीयत में इसे पुण्य का काम कहा गया है, दीन के रास्ते पर चलने वालों को कानूनी मदद तैयार रहती है और आप तो जानते हैं कि वो आधी रात को भी कोर्ट खुलवा सकते हैं, वहीं आपकी FIR तक नही दर्ज होती।

उपचार

इस भयानक बीमारी का कोई एक इलाज नही है, सरकार को गैर जमानती कानून बनाना पड़ेगा जैसा आज मध्य प्रदेश सरकार ने किया, पर सबसे बड़ी जिम्मेदारी हमारी है, हम अपनी बच्चियों को इस षड्यंत्र के विषय मे खुलकर बतायें, स्कूल या कोचिंग स्वयं लेकर जायें और साथ लाने का ध्यान रखें, आस पास की मुस्लिम दुकानों पर नज़र रखें, रिचार्ज करवाने स्वयं जाएं बच्चियों को न भेजें, बच्ची के साथियों का ध्यान रखें पर उसे ज्यादा टोकें नहीं केवल आवश्यकता पड़ने पर ही कुछ समझाएं। बजरंग दल जैसे संगठनों की सहायता लें। आपके गली मोहल्ले के लफंगों के विषय मे पुलिस को लिखित सूचना दें और एक कॉपी अपने पास रखें।

अपनी दुकानों को मुसलमानों को न दें और न ही उनकी दुकान पर किसी भी कीमत पर अपने बच्चों को भेजें, आप जहां भी रहते हैं वहां अपनी विचारधारा के लोगों से जुड़ें और संगठित रहें, जातिगत भेद भुला कर साथ जुड़ें।

अगर हम साथ रहें तो इस समस्या से निपटा जा सकता है, सेक्युलर आप बन सकते हैं, मुसलमान कभी सेक्युलर नही होता अतः इस बात को ध्यान में रखें, सजग रहें सुरक्षित रहें।।

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