किसानों के नाम पर आज कल हर विपक्षी पार्टियां अपना राजनीतिक लाभ साधने की कोशिश कर रही है। जबकि असली किसान आज भी खेती में व्यस्त हैं। मौजूदा मोदी सरकार की कृषि नीतियां युवाओं को इस तरह भा रही है कि कई युवा अच्छी नोकरी छोड़ कर कृषि मे अपना भविष्य बना रहे हैं तो एक तरफ बिचोलियों और राकेश टिकैत जैसे कांग्रेस आरएलडी के मोहरों के बहकावे में आकर कुछ किसान खेती छोड़ कर आंदोलन कर रहे हैं जो की बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।

झारखंड में कांग्रेस की जन आक्रोश रैली तन आक्रोश में बदल गई।
क्या देश के किसानों की यही मांग थी जो लैला ओ लैला गाने पर पलंगतोड डांस दिखाया गया।
आखिर वो पल आ ही गया जिसका बिचोलियों को इतने वर्षो से इंतजार था। यह तन आक्रोश रैली कहीं राजनीतिक भूचाल ना कर दे। कांग्रेस ने खेला अपना आखिरी दाव पर नागिन डांस ना दिखाने पर कई लोगो मे नाराजगी।
जन आक्रोश रैली या तन आक्रोश रैली, आज बड़े बड़े चाटुकार इतिहासकार, चाटुकार रत्न इस पलंगतोड लैला ओ लैला डांस को क्रान्तिकारी बताने में अपनी चाटुकारी बुद्धि का प्रयोग करेंगे।

आप सबका अपना भाई
एक देशभक्त लेखक
अमित कुमार।

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