भारतीय हिंदुओं के धर्मांतरण मुहिम में एक बड़ा धिक्कार मक्कार नाम है …मदर टेरेसा। जी हां ईसाई नन मदर टेरेसा ने लोभ-लालच-फ्रॉडगिरी के तरह जितना गरीब हिंदुओं का धर्मांतरण करवाया है उसके लिए उनकी रूह को खुद चर्च में Confess करना चाहिए। 1910 में जन्मी मदर टेरेसा 1931 में कलकत्ता आईं और फिर यहीं की होकर रह गईं। वेटिकन और मिशनरीज ऑफ चैरिटी के साथ मिलकर भारत में धर्मांतरण कार्यक्रम चलाने वाली मदर टेरेसा को ‘दया की मूर्ति’, ‘करुणा की मूर्ति’ टाइप पोस्टर नामों से पुकारा गया, मगर असलियत दबी ही रही।

कोलकाता आने के बाद मदर टेरेसा ने पश्चिमी चर्चों से धन मांगने के लिए कोलकाता को गरीबों का शहर के रूप में प्रचारित किया। ऐसे में उनके पास अरबों रुपया चर्च की तरफ से पैसा आता था और इस पैसे का इस्तेमाल वे गरीब हिंदुओं के धर्मांतरण के लिए किया करती थी। सिर्फ अपने आशीर्वाद से गरीबों को ठीक करने का दावा करने वाली मदर टेरेसा और उनकी नन स्वयं अपना इलाज बड़े और महंगे अस्पतालों में करवाया करती थी। अरबों डॉलर में मिलने वाली डोनेशन से ये गिरोह लोभ लालच के दम पर गरीब हिंदुओं का धर्मांतरण करवाते थे।

बांग्लादेश युद्ध के दौरान लाखों महिलाओं के साथ हुए बलात्कार से ठहरे गर्भ को पवित्र आशीर्वाद कहने वाली मदर टेरेसा के तार भोपाल गैस कांड अभियुक्त वारेन एंडरसन से भी जोड़े जाते हैं। भोपाल गैस कांड के बाद अक्सर मदर टेरेसा कोलकाता से भोपाल जाया करती थी और उस समय की सरकार से वारेन को माफ किये जाने के पक्ष में अपील किया करती थीं। महान दार्शनिक आचार्य रजनीश ने भी मदर टेरेसा द्वारा धर्मांतरण करवाए जाने की निंदा की थी, रजनीश ने साफ शब्दों में कहा था कि मदर टेरेसा की सेवा महज एक दिखावा है उनका असली उद्देश्य धर्मांतरण करवाना है। वेटिकन के इशारे पर पर्दों के पीछे कई चेहरे लेकर काम करने वाली मदर टेरेसा ने जो किया वो न महज फ्रॉडगिरी थी बल्कि भारत की भोली भाली जनता को फुसलाकर ईसाई बनाने की कुटिल कवायद भी थी, अब वक्त आ गया है कि हम हिंदुस्तानी जो बताया, समझाया, पढ़ाया जाता है उसे भूल जाएं और इन जैसे चेहरों की असलियत को जानें।

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