रेप के आरोपी मौलवी,मौलाना,पादरी को ‘स्वामी-बाबा’ लिखने वाले Times Of India पर भड़की जनता

देश में बरसों से हिंदू प्रतीकों को अपमानित करने की होड़ सी रही है। अक्सर अखबारों और चैनलों पर खास मुहिम के चलते सनातन का उपहास बनाया जाता है। इसी के तहत गौर करने वाली बात ये है कि अक्सर कई अंग्रेजी अखबार हिंदू नफरत के अपने प्रोपेगेंडा के तहत हिंदू बाबा-संत type नामों को बदनाम करने की मुहिम चलाते हैं।
सोशल मीडिया पर कई यूज़र्स अखबार ‘टाइम्स ऑफ इडिंया’ की उस खबर से नाराज हैं जिसमें उसने अप्राकृतिक सेक्स करने के आरोप में आसिफ नूरी नाम के मौलाना पर न्यूज़ प्रकाशित की है और खबर में हिंदू साधु की तस्वीर लगाई हुई है। यानी करतूत करें मौलाना जी और तस्वीर लगे साधू की, ये कहाँ की पत्रकारिता है?
Asif Noori is the name of this Godman.
— DR JAGADISH HIREMATH MD (@Kaalateetham) September 18, 2020
Can you please tell me why @timesofindia is using caricature of a Hindu rishi here? Why do they do it? What is the agenda of this ??? pic.twitter.com/jsIBQKQncq
इसके अलावा सूरत की एक खबर का भी जिक्र किया जा रहा है जिसमें 14 वर्षीय लड़की और उसकी मां के शोषण का जिक्र है। खबर के शीर्षक में ‘स्वामी’ नाम लिखा गया है जबकि आरोपी का नाम अकबर अली है।
Sir, this is the History of Times of India pic.twitter.com/6LVLWC1aiQ
— pkp (@1234pkp) September 18, 2020
इस तरह की हिंदू विरोधी सेलेक्टिव पत्रकारिता का विरोध होना शुरू हो गया है और सोशल मीडिया पर अब ये आवाजें उठनी शुरू हो गई हैं।
Why is the swami used here ?? Disgusting
— I am DΞ3-PU !!↗️ (@i_M_wat_i_am) September 18, 2020
जनता अख़बार की अंग्रेजी मानसिकता से आंखों में आंखें डालकर सवाल पूछ रही है मगर अंग्रेजी काले कोट के नीचे के अंधेरे में ये सब दोगलेपन के कलमकार छिपे हुए हैं।
Bloody hinduphobics !!!
— Himani Gupta (@0801Himani) September 18, 2020
They do this clearly just to fool the people who make their perception just after reading the headline !!! @timesofindia this needs to stop. Already our youth is headed towards Adharm, pls don't add to our problems. ?? @Kaalateetham
इसके अलावा एक चर्च के पादरी के माथे पर तिलक वाली फोटो जानबूझकर अखबार में लगाई गई है ताकि आरोपी पादरी हिंदू दिखे
Doctorji ,look at this too. https://t.co/2EjajY45y8
— nachiket (@ngalgali) September 18, 2020
जाहिर है जनता जब स्वयं जागरूक हो जाएगी तो इन अंग्रेजी कम्युनिस्ट पिट्ठुओं की पीठ पर सवार होकर सवाल पूछेगी कि सिर्फ सनातन धर्म का ही अपमान क्यों? और अब वो समय आ गया है, आप भी जागरूक बनिए।
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