अफ़ज़ल : खंज़र /हथौड़े लिए घूम रहे हैं : तुम कब शिवाजी बनोगे ??

जरा सा याद करो वो घटना जब दोस्ती करने के बहाने अपने यहां बुलाकर मुगल सेनापति अफज़ल खान न अपने विश्वासघाती चरित्र के अनुरूप ही , धोखे से शिवाजी को मारना चाहा मगर शिवाजी इन एहसानफरामोश धूर्त , मक्कार मुगलों को पहले ही पहचान चुके थे उन्होंने उसी वक्त अफ़ज़ल को मौत के घाट उतार दिया .
सैकड़ों सालों बाद भी मुगलों का विश्वासघाती चरित्र नहीं बदला . आज भी अफ़ज़ल की संताने छुरे , खंज़र और हथौड़े लिए किसी रिंकू और किस नीतू के विश्वास की हत्या किए चला जा रहा है . और अब तो ये उसके लिए बहुत आसान और साधारण सी बात हो गई है .
क्योंकि इन अफ़ज़लों लाईक खानों को बहुत अच्छी तरह से ये अंदाज़ा है कि रोज़ ऐसी हत्याओं को देखने सहने के बावजूद भी दोस्ती के लिए , विश्वास के लिए , प्यार के लिए इन पर आँख मूंद कर भरोसा कर लेते हैं . कभी अपना खून देकर ,कभी अपना घर देकर और आखिरकार अपनी जान देकर ये एकतरफा इंसानियत दिखाता और चुकाता रहता है .
DISCLAIMER: The author is solely responsible for the views expressed in this article. The author carries the responsibility for citing and/or licensing of images utilized within the text.