कुरैशी साब ! बार बार आप सबको किताब लिखकर अपनी “मासूमियत ” क्यों साबित करनी पड़ती है ??

अभी पूर्व राष्ट्रपति डॉ ज़ाकिर हुसैन भारत में सारे पदों पर आराम से रह कर रिटायर होते ही डर कर थर थर काँपना शुरू ही हुए थे कि अब पूरे दो वर्ष तक देश के मुख्य चुनाव आयुक्त रह कर सेवा से अवकाश प्राप्ति के बाद अब उन्हें भी ये सबको बताना बल्कि कहा जाए कि चेताना पड़ रहा है कि असल में तो कौम मासूम है और भारत में मासूमों के साथ ये भौत ज्यादा गलत सलत हो रहा है जो बिल्कुल खत्म होना चाहिए – यानि कुल मिला कर कुरैशी साब ने शाहरुख खान की पिक्चर – I am khan and I am not a terrorist की स्क्रिप्ट दोबारा से लिख दी है , बस .
कुरैशी साब ! असल में इन सारी बातों की वजह भी और असली दिक्कत भी आप जैसे ही लोग हैं जो हर बार अपने लोगों की अशिक्षा ,बेरोजगारी , और पिछड़ेपन का ठीकरा पूरी दुनिया पर फोड़कर ,इस बात का बदला पूरी दुनिया से लेने की मुहिम पर निकल जाते हैं ??
कभी सोचिए कि आपने और आपके लोगों ने कभी भी संजीदगी से स्कूल , अस्पताल , कोई प्रशिक्षण केंद्र कोई भी कायदे की छोटी बड़ी कोशिश करने की सोची भी है . हमें ये चाहिए , वो चाहिए , ये दो वो दो , सब दे दो . ठीक है , कभी सोचा है कि , जनाब कुरैशी साब आप लोग क्या दे रहे हैं , देश को , दुनिया को . असल में दिमाग के किसी भी कोने में कभी भी कोई भी रचनात्मक , आधुनिक , विकास जैसा कुछ रहा ही नहीं .
तो कुल मिला कर अब मामला कुछ ऐसा है कि , ये चिट्ठी लिखना , किताब लिखना ,पुरस्कार वापस करना और इस बहाने से भारत ,सरकार और हिंदुओं को बदनाम करने की उन पर आरोप लगाने वाली काठ की हाँडी कब की सुलग के फुंक चुकी है .
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