झारखंड के दुमका जिले में जिस सनकी शाहरुख हुसैन ने एकतरफा प्यार में 17 साल की अंकिता पर पेट्रोल छिड़का था आखिरकार वो जिंदगी की जंग हार गई. 95 फीसदी से ज्यादा जल चुकी अंकिता आखिर कब तक लड़ती. रविवार को अंकिता की हुई मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. सोशल मीडिया पर लगातार अंकिता के वीडियोज शेयर किये जा रहे थे. जिसके बाद अंकिता को न्याय दिलाने की मुहिम तेज होती जा रही है. सोमवार सुबह अंकिता का अंतिम संस्कार कर दिया गया। बेटी को विदा तो करना ही था दिल पर पत्थर रख कर उसके दादा ने उसे मुखाग्नि दी।

लेकिन अंकिता की हत्या का जिम्मेदार जितना शाहरुख हुसैन है उतनी ही राज्य की सरकार भी है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अंकिता के परिवार की आर्थिक स्थिति नहीं थी. एक किराना दुकान के सहारे परिवार अपनी जिंदगी गुजार रहा था. जब शाहरुख ने अंकिता पर पेट्रोल छिड़का था तो तकरीबन 95 फीसदी वो जल चुकी थी. परिवार वालों ने खूलो झानो अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन गंभीर हालत की वजह से डॉक्टरों ने रांची रेफर कर दिया. परिवार वाले दिन भर पैसे का जुगाड़ करते रहे . रात में जब पैसे का इंतजाम हुआ तब परिवार वाले अधमरी हालत में अंकिता को रांची ले गए. क्या अंकिता के लिए सरकार या फिर स्वास्थ्य मकहमे की तरफ से कोई व्यवस्था वहीं होनी चाहिए थी ? क्या समय पर उसका इलाज शुरू नहीं करवाना चाहिए था ?

हमारा सवाल हेमंत सोरेन की सरकार से इसलिए है क्योंकि एक तरफ इसी सरकार ने कुछ दिनों पहले हुए जुम्मे की नमाज के बाद रांची के मेन रोड उपद्रव में घायल नदीम को एयर एम्बुलेंस से सरकारी खर्च पर दिल्ली भेज मेदांता में इलाज करवाया था. रिपोर्ट के मुताबिक नदीम के इलाज में तकरीबन 10 लाख से ज्यादा रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है. वहीं अंकिता को रांची भेजने तक का इंतजाम नहीं किया गया. एक बेटी को मरता हुआ छोड़ दिया गया. अंकिता की जान बचाई जा सकती थी, अगर उसे भी बेहतर इलाज मिल पाता। आज जिस तरह से उसकी मौत के बाद राज्य सरकार ट्विटर पर एक्टिव दिख रही है काश उसके इलाज के समय भी सरकार थोड़ी जाग जाती तो एक होनहार बेटी इस तरह से किसी सनकी शाहरुख की शिकार नहीं होती.

साभार-ट्विटर

आखिर ये दोहरी मानसिकता क्यों? इसका जबाव झारखंड की जनता आपसे मांग रही है सीएम साहब. दरअसल शाहरुख हुसैन तो उसका कातिल है ही लेकिन अंकिता के खून के छींटे ने सरकार के दामन को दागदार किया है.अंकिता तड़प- तड़प कर खत्म हो गयी लेकिन सूबे के CM साहब का पिकनिक खत्म नहीं हो रहा . और तो और हाथरस जाकर हंगामा करने वाले भाई-बहन की जोड़ी को टाईम नहीं मिला क्यूंकि हत्यारे का नाम शाहरुख़ है शंकर नहीं!

अब बताइए इसे तुष्टीकरण नहीं कहें, तो क्या कहें!

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