रायल इण्डियन नेवी के बॉम्बे म्युटिनी की 75 वीं वर्षगांठ

स्वयं ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली ने एक इंटरव्यू में यह स्वीकारा था कि पहले नेताजी सुभाष चन्द्र बोस और आज़ाद हिन्द फ़ौज द्वारा मजबूती से ब्रिटिश सेना का समाना करना और भारतीय जनमानस में लोकप्रियता हासिल करना और फ़िर इस विद्रोह के बाद अँग्रेज़ यह समझ गए थे कि भारतीय सैनिकों के बल पर भारतियों पर राज करना अब संभव नहीं हो पाएगा और इसी कारण 15 अगस्त 1947 को सत्ता सौंप भारत को स्वतंत्र घोषित करने पर बाध्य हुए।

किसान आंदोलन की आड़ में होती भारत विरोधी मुद्दों की डिजिटल मार्केटिंग

ये डिजिटल मार्केटिंग का दौर है, साहब। आप इसे जितनी जल्द समझ जाएं उतना अच्छा। सोशल मीडिया के इस दौर में आप के मोबाइल...

भारतीय सेना के पहले परमवीर चक्र विजेता – अमर शहीद मेजर सोमनाथ शर्मा

मेजर सोमनाथ की प्राण त्यागने से बस कुछ ही पहले, अपने सैनिकों के लिए अंतिम ललकार थी:- "दुश्मन हमसे केवल पचास गज की दूरी पर है। हमारी गिनती बहुत कम रह गई है। हम भयंकर गोली बारी का सामना कर रहे हैं फिर भी, मैं एक इंच भी पीछे नहीं हटूंगा और अपनी आखिरी गोली और आखिरी सैनिक तक डटा रहूँगा।"

भारतीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के जनक डा. होमी जहांगीर भाभा की ५५ वीं पुण्यतिथि

डा. भाभा एक कुशल वैज्ञानिक और प्रतिबद्ध इंजीनियर होने के साथ-साथ एक समर्पित वास्तुशिल्पी, सतर्क नियोजक, एवं निपुण कार्यकारी थे। वे ललित कला व संगीत के उत्कृष्ट प्रेमी तथा लोकोपकारी थे। 1947 में भारत सरकार द्वारा गठित परमाणु ऊर्जा आयोग के प्रथम अध्यक्ष नियुक्त हुए। १९५३ में जेनेवा में अनुष्ठित विश्व परमाणुविक वैज्ञानिकों के महासम्मेलन में उन्होंने सभापतित्व किया। भारतीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के जनक का २४ जनवरी सन १९६६ को एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया था।

विरोध के निशाने पर राष्ट्रीय पर्व ही क्यूँ !?

गणतंत्र दिवस का अपमान हमारा और आपका अपमान है, ये गणतंत्र हमारे और आपके बिना अस्तित्व में नहीं आया। जो इसको अपमानित करने की बात करते हैं वो सीधे तौर पर हमें अपमानित करने की साजिश रच रहे हैं, ऐसे लोगों का मुखर विरोध करें।

७३ वां भारतीय सेना दिवस

हर साल इस दिन भारतीय सेना का हर एक जवान राष्ट्र के प्रति अपने समर्पण की कसम को दोहराता है और एक बार फिर मुस्तैदी से तैनात हो जाता है राष्ट्र सेवा के लिए ! इस दिन की शुरुआत दिल्ली के अमर जवान ज्योति पर शहीदों को सलामी दे कर की जाती है ! इस साल भारतीय सेना अपना ७३ वां सेना दिवस मना रही है !

चटगांव विद्रोह के नायक, आडंबरहीन और निर्भीक नेतृत्व के प्रतीक – महान क्रान्तिकारी सूर्य सेन ‘मास्टर दा’

१८ अप्रैल १९३० के दिन चटगाँव के सीने पर ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध सशस्त्र युवा-क्रांति की आग लहक उठी। चटगाँव क्रांति में मास्टर दा का नेतृत्व अपरिहार्य था। मास्टर दा के क्रांतिकारी चरित्र वैशिष्ट्य के अनुसार उन्होंने जवान क्रांतिकारियों को प्रभावित करने के लिए झूठ का आश्रय न लेकर साफ़ तौर पर बताया था कि वे एक पिस्तौल भी उन्हें नहीं दे पाएँगे और उन्होंने एक भी स्वदेशी डकैती नहीं की थी। आडंबरहीन और निर्भीक नेतृत्व के प्रतीक थे मास्टर दा।

सियाचिन की बर्फीली चोटियों पर विजयी तिरंगा लहराने वाले परमवीर नायाब सूबेदार / आनरेरी कैप्टन बाना सिंह

यहाँ हम जिस प्रसंग का जिक्र विशेष रूप से कर रहे हैं, वह वर्ष 1987 का है। पाकिस्तान ने सियाचिन ग्लेशियर पर, भारतीय सीमा के अन्दर अपनी एक चौकी बनाने का आदेश अपनी सेनाओं को दे दिया। वह जगह मौसम को देखते हुए, भारत की ओर से भी आरक्षित थी। वहाँ पर पाकिस्तान सैनिकों ने अपनी चौकी खड़ी की और 'कायद चौकी' का नाम दिया। सियाचिन में जो चौकी बाना सिंह ने फतह की, उनका नाम बाद में 'बाना पोस्ट' रख दिया गया। बाना सिंह ने इस कार्यवाही के लिए परमवीर चक्र पाया।

अखंड भारत के पहले प्रधानमंत्री द्वारा स्वतंत्र भूमि पर तिरंगा फहराने की 77 वीं वर्षगांठ

77 वर्ष पूर्व इसी दिन नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अखंड भारत की स्वतंत्र भूमि पर पोर्ट ब्लेयर में आजादी का झंडा फहराया था। 30 दिसंबर, 1943 को नेताजी ने पहली बार स्वतंत्र भारतीय जमीन पर सबसे पहले तिरंगा फहराया था।

आधुनिक भारत के स्वप्न-द्रष्टा – डा॰ विक्रम साराभाई

डॉ॰ विक्रम साराभाई के नाम को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम से अलग नहीं किया जा सकता। यह जगप्रसिद्ध है कि वह विक्रम साराभाई ही थे जिन्होंने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत को अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थान दिलाया। लेकिन इसके साथ-साथ उन्होंने अन्य क्षेत्रों जैसे वस्त्र, भेषज, आणविक ऊर्जा, इलेक्ट्रानिक्स और अन्य अनेक क्षेत्रों में भी बराबर का योगदान किया।