सच मत छापों , हम नंगे हो जाएंगे

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के ठेकेदार जो एक किताब से डर हुए हैं
वामपंथी और इस्लामिक गैंग एक किताब से डर के भाग रहे हैं। निधि राजदान, सबा नकवी, विलियम डालरिम्पल से लेकर शेहला राशिद तक सब एक किताब से डर कर भाग रहे हैं।
ये किताब छप ना जाएं, कोई इसे पढ़ ना लें। हमारा झूठ बेनकाब ना हो जाएं। लेखकों को, पब्लिशर को डराया जा रहा हैं। धमकाया जा रहा हैं। क्योंकि दिल्ली के दंगों का सच सामने आ जायेगा तो इन सबकी दुकानें बंद हो जायेंगी। झूठ की दुकान। हत्यारों को हीरो बनाने की दुकानें। टीवी में, अखबारों में, किताबों में आतंकवादियों को मासूम बताने की दुकानें
पुरानी कहावत हैं मुस्लिम आतंकवादी कलम से डरते हैं। पेन की ताकत से डरते हैं। क्योंकि कलम से लिखा हुआ सच मुस्लिम आतंकवादियों को नंगा कर देता हैं।
एक बानगी देखिये, कैसे बड़े बड़े अभिव्यक्ति के ठेकेदार एक किताब से डर कर नंगे हो गए :
Does hate speech come under freedom of speech and should be protected?
— Rana Safvi رعنا राना (@iamrana) August 23, 2020
No? I think so too.
Please read and understand what freedom of speech actually is.
Well done @BloomsburyIndia. And also reveals how anxious some of these hatemongers are to take respectable logos and attach it to their trash. https://t.co/RqIKm037My
— Saba Naqvi (@_sabanaqvi) August 22, 2020
It’s simple- misrepresentation of facts to vilify oppressed communities and hate speech that instigate violence is NOT protected under free speech.
— Gurmehar Kaur (@mehartweets) August 22, 2020
Free speech is not blanket concept and it’s application as such is complicity in oppression. #bloomsburyindia
Excellent News ! @BloomsburyIndia withdraws publication of the Delhi Riots propaganda literature.
— Arfa Khanum Sherwani (@khanumarfa) August 22, 2020
Congratulations to each one of you who raised their voice. https://t.co/BddLHV0J8I
DISCLAIMER: The author is solely responsible for the views expressed in this article. The author carries the responsibility for citing and/or licensing of images utilized within the text.