देश में कोरोना का भाषण समय चल रहा है मगर प्रोपेगेंडा करने में माहिर रवीश कुमार, अभिसार शर्मा ,आदेश रावल जैसे पत्रकार अपना स्वघोषित एजेंडा चला रहे हैं ।प्रोपेगैंडा की खबरों को ये बिल्कुल भी वेरिफाई नहीं करते और ये अपने को खोजी और निष्पक्ष पत्रकार कहते फिरते हैं। इनके लिए ऐसे फोटोज ही वेरिफाइड होते हैं जहाँ M का एंगल दिख जाए।

सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से एक फोटो वायरल हो रही है जिसने एक मुस्लिम शख्स एक हिंदू के पिता के पास खड़ा हुआ दिख रहा है । सेकुलर मीडिया ने इस खबर को ऐसे प्रकाशित किया कि मोहम्मद यूनुस अनुभव शर्मा नामक शख्स को मुखाग्नि दे रहा है, जबकि अनुभव शर्मा के पूरे परिवार ने उससे मुंह फेर लिया । अब हम आपको सच बता दे कि अनुभव शर्मा न तो कोविड से मरा है और न मोहम्मद यूनुस ने मुखाग्नि दी है।


अनुभव शर्मा नामक शख्स न्यूरो प्रोबमल्स के चलते मृत्यु को प्राप्त हुए है न कि कोरोना के चलते और उनके बड़े भाई शरद शर्मा ने मुखाग्नि दी है। शरद शर्मा का ट्रांसपोर्टेशन से रिलेटड बिजनेस है और मोहम्मद यूनुस उसकी एक गाड़ी का ड्राइवर है। अंतिम यात्रा में शामिल 25 लोगो के साथ मुुुहम्मद यूूनस भी शमशान जाता है।


दरअसल सच यह है कि शरद शर्मा मुखाग्नि देते है और उसके बाद चिता में 5 किलो राब डालना होता है जो कि वहाँ जो उपस्थित होते हैं सबको डालना होता है। उसी क्रम में मोहम्मद यूनुस भी राब डालता है। ये राब डालते हुए का फोटो जैसे ही खोजी पत्रकारों तक पहुंचती है वैसे ही इन सबको जैसे प्राणवायु मिल गई हो इस घड़ी में। लगे सब अपने तरीके से स्टोरी छापने और एक दूसरे का कॉपी पेस्ट करने बिना कुछ तहकीकात के। इन तथाकथित खोजी और निष्पक्ष पत्रकारों को शर्म नहीं आती है।

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