मानवता के लिए मानव होना…

हम अपने निकट और प्रिय लोगों से, अन्य सामाजिक तत्वों से, अपने स्वयं के मन से बहुत सारी उम्मीदों से प्रेरित हैं और हम पूरे जीवन में उन उम्मीदों के आस-पास दौड़ते हैं कि यह खुशी और मन की शांति का कारण बनेगी। एक उम्मीद पूरी होती है, तुरंत हमारे दिमाग में एक नई बात आती है, फिर हम उसका पीछा करना शुरू करते हैं और यह पूरी जिंदगी चलता रहता है। निश्चित रूप से, यह जीवन में बढ़ने के लिए जरुरी है, लेकिन केवल भौतिक विकास ही जीवन का एकमात्र उद्देश्य है? हमें इस पर विचार करने की जरूरत है।
ब्रह्मांड में हर जीव की मदद करने के लिए प्रकृति अपने पास का निःस्वार्थ भाव से सब कुछ देती है। यह कभी भी भेदभाव नहीं करता है कि जीवित व्यक्ति प्रकृति की ओर कुछ बदले मे देता है या नही। मनुष्य जीवन सभी जीवित प्राणियों मे सौभाग्यशाली है क्योकीं प्रकृति ने हमें विशाल मन, विशाल बुद्धि, स्मृति नामक असीमित भंडारण दिया है जिसे हम उद्देश्य जानने के बाद भी अनदेखा कर देते हैं और इसे गंभीरता से नही लेते हैं। हमें गंभीरता से पुनर्विचार करने की आवश्यकता है कि हमारा जीवन तनाव, दुख से क्यों भरा है, हम में से कई लोग अवसाद, चिंता और कई मानसिक विकारों से पीड़ित हैं। आनंद और मन की शांति पाने के लिए हर समय बाहर की ओर दौड़ते हुए, हम एक गुणवत्तापूर्ण जीवन जीने के लिए अंदरुनी यात्रा को भूल जाते हैं।
*लोग बाहरी रूप से परिपूर्ण जीवन बनाने की कोशिश करते हैं, लेकिन जीवन की गुणवत्ता भीतर कि यात्रा पर आधारित होती है ”
सद्गुरु जग्गी वासुदेव
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