प्रदर्शनकारियों को “खालिस्तानी”/”राष्ट्र विरोधी” न कहें मीडिया हाउस : एडिटर्स गिल्ड का फतवा

हाथरस काँड और इन जैसे बहुत अन्य मामलों की ओछी द्वेषपूर्ण और निम्न स्तरीय पत्रकारिता या पत्रकार सम्पादक अर्नब गोस्वामी की अवैध गिरफ्तारी के विरूद्ध एक शब्द भी नहीं बोलने वाला एडिटर्स गिल्ड भी इन दिनों , हमेशा ही देश विरोधियों के साथ ठीक उसी तरह खड़ा दिखाई देता है जैसे कभी एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया मानवाधिकार की रक्षा के नाम पर आतंकियों और अपराधियों के साथ खड़ा दिखता था।
पिछले कुछ दिनों से जिस तरह से पहले किसान विरोध के नाम पर , पंजाब के कांग्रेसी किसानों का भेष धर के दो राज्यों को पार करते हुए राजधानी दिल्ली में अराजकता फैलाने के उद्देश्य से उसे बंधक बनाए हुए हैं , उसमें धीरे धीरे कभी भगवा चोला धारण किये हुए तो कभी कोई किसी भीम आर्मी के झंडे लिए , और कोई खालिस्तान ,पाकिस्तान के समर्थन की तख्तियां लिए हुए तमाम राष्ट्रविरोधी लोग एक षड्यंत्र के तहत एकत्रित हो गए। सरकार द्वारा बातचीत के लिए बुलाए जाने और लगातार वार्ता चलने के बावजूद भी इन सब छद्द्म वेश धारी किसानों ने इस प्रदर्शन को समाप्त नहीं किया है।
ये तो महज़ एक छोटी सी बानगी भर है असल जहर और किसानों के भेष में अपने भीतर सरकार , मोदी ,भाजपा और अब तो हिन्दुओं के विरूद्ध क्या और कितना घिनौना किस किस के द्वारा कहा जा रहा है वो सब धीरे धीरे मीडिया और सोशल मीडिया में दिखाई सुनाई दे रहा है।
After watching this video, nobody will have any doubt about #Pakistan_Congress_Khalistani link to #FarmerProtestHijacked by #AntiIndia forces pic.twitter.com/78jEoS1qVz
— Hemanta Pandit (@HemantaPandit11) November 30, 2020
इस तरह के तमाम वीडियोज़ , और फोटो सोशल मीडिया पर पसरे हुए हैं जो इस तथाकथित किसान विरोध प्रदर्शन की सारी पोल खोल रहे हैं और केंचुली के भीतर असली सर्प मानसिकता को बाहर ला रहे हैं।
#FarmerProtestHijacked
— Uday sharma (@Udaysha98313533) November 30, 2020
Farmer or Khalistani abusing Hindu and planning to kill them ? pic.twitter.com/I5NZGz2Wmy
और आखिर में अब ये भी जान लीजिए की इन छद्म धारी किसानों के लिए ऐसा प्रेम एडिटर्स गिल्ड के मन में क्यों जग गया है तो ये देखिये , आगे आप खुद समझ जाएंगे।
अब आप समझ ही गए होंगे कि मैंने शीर्षक में क्यों इसे एडिटर्स गिल्ड का फतवा कहा है वैसे भी जब दस सालों तक उपराष्ट्रपति बने मुग़ल हामिद अंसारी अपना मुगलिया एजेंडा चला सकते हैं तो फिर मैडम गुलाम ए मुस्तफा क्यूँ नहीं चला सकतीं।
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