भारत जो सनातन हिन्दू समाज का पवित्र स्थान है ,वही ये सकल हिन्दू समाज का मूल स्थान भी है । भारत में सनातन धर्मसेही जैन ,सिख और बौद्ध धर्मका उदय हुआ है। सनातन हिन्दू धर्म दुनिया का सबसे पुराना धर्म माना जाता है। सनातन धर्म का इतिहास दस हजार साल से भी पुराना है। 

इसी सनातन धर्मपे पिछले ३००० साल से कठिन विपत्तिया आयी, फिर भी सनातन धर्म इस भारतकी पवित्र धरतीपर टिका रहा। बुद्ध और सिख धर्म का उदय भी सनातन धर्मकी जड़े हिला नहीं सका। वही ग्रीक, मंगोल ,मामलुक, खिलजी,तुग़लक़ ,सय्यद,लोदी और मुघलोंके आक्रमण भी हिन्दू धर्म को मिटा न सके। सारे मुग़ल शासकोंने सनातन धर्मको मिटानेके लिए पूरी जिंदगी प्रयास किया, पर महाराणा संघा, महाराणा कुंभा, महाराणा प्रताप , सूरजमल जाट, छत्रपती शिवाजी महाराज ,संभाजी महाराज,पृथ्वीराज चौहान ,कॄष्णदेवराया , राजराजा चोला ,राजा मिहिर भोज, राणा हमीर,महाराणी ताराबाई ,राजा रघुजी भोसले,झाँसीकी रानी लक्ष्मीबाई और बाजीराव पेशवा जैसे महान हिन्दू शासकोंने हिन्दू धर्मकी शान में कमी नहीं आने दी।

  

         पर बीसवीं सदीमें बाते पूरी तरह बदल चुकी थी। हिन्दू समाजने शांतिका मार्ग चुना था , पर मुसलमान हिंसापे आमादा होते हुए दीखे। स्वामी विवेकानंद , नोबेल विजेते रबीन्द्रनाथ टैगोर, स्वामी दयानन्द सरस्वती ,स्वातंत्र्यवीर सावरकर,संघ संस्थापक हेडगेवार, भारतरत्न डॉक्टर आंबेडकर ,स्वातंत्र्य सेनानी लाला लाजपतराय, एनी बेसंट, स्वामी श्रद्धानन्द इन सभीने इस इस्लामकी हिंसाका विरोध किया था। हिंदुओंको गांधीके अहिंसक आंदोलनने निशस्त्र करके रखा था, पर मुसलमानोने अपने हिंसाके रास्तेको कभीभी नहीं छोडा। उन्होंने बीसवीं सदीमे हिंदुओंके बारह सबसे बड़े हत्याकांड को अंजाम दे दिया। कल १९ जनवरी को कश्मीर में हुए हिंदुओंके हत्याकांड को ३२ साल पुरे हुए ,इसके संबंध में हम देखते है भारतीय उपखण्ड में हुए बड़े हिंदुओंके नरसंहारोंको को।  

१) मलबार हिन्दू हत्याकांड –

केरलाके मलबारमें मोपला मुसलमानोने १९२१ में हिंदुओंका बहुत बड़ा और घृणाणस्पद हत्याकांड किया था। दस हजार से भी ज्यादा हिंदुओंका बड़े बेरहमीसे क़त्ल किया था। इस नरसंहार में हजारो हिन्दू स्त्रियोंपे मुसलमानोने घृणास्पद अत्याचार किया। एक लाख से भी ज्यादा हिंदुओंने अपना सब घर भर छोड़ कर पलायन किया । वही हजारो हिंदुओंका जबरदस्ती धर्मान्तर किया था। आर्य समाज ने इसमेसे ३००० से भी ज्यादा हिंदुओंकी हिन्दू धर्म में घर-वापसी कराई थी। इसी बजहसे केरलके मलप्पुरम जिले में आज भी मुसलमान बहुसंख्यांक है। सबसे बड़ी विडंबना ये है की ये हिन्दू हत्याकांड करने वाले मुसलमान आतकवादीयोंको स्वातंत्र्य सेनानी का किताब केरल सरकारने दिया है। अली मुसलियार और वैरिकुन्नथ हाजी इन मुसलमान आतंकवादियोने ने हिंदुओंके नरसंहार की शुरुआत की थी।  इतने बड़े हिंदू नरसंहार के बाद भी गांधीने मुस्लिमोंकी तारीफ की थी। 

मुस्लिम आतंकवादी अली मुसलियार 

२) नौखाली हिंदू हत्याकांड –

बंगालके नौखालीमें १९४६ में हुआ ये हिंदुओंका सबसे नृशंश हत्याकांडमेसे एक माना जाता है। कमसे कम पांच हजारसे भी ज्यादा हिंदुओंकी हत्याएं की गयी , हजारो हिन्दू महिलाओंपे घृणास्पद अत्याचार किया गया। कुछ इतिहासकारोंने कहा है नौखालीके ९५ प्रतिशत हिंदुओंको जबरदस्ती धर्मांतरित किया गया, और एक इतिहासकार ने कहा है २२,२५० हिंदुओंको जबरदस्ती धर्मांतरित किया गया। जब महात्मा गांधी नौखाली शांती बहाल करने पहुंचे तो ,मुसलमान नेताओंने इसका भरपूर विरोध किया ,उसी बजह से गाँधी बंगालसे निकल गए और हिंदुओंके लिए संदेशा पंहुचाया की ” मरो या भागो”।

            भारतीय स्वतंत्र सेनानी लालमोहन सेन जो १६ साल ब्रिटिश जेल में काटकर १९४६ बहार आये थे ,उनकी भी मुसलमानोने हत्या की थी। 

 

स्वतंत्र सेनानी लालमोहन सेन

३) डायरेक्ट एक्शन डे –

देश को तोड़कर पाकिस्तान निर्माणके लिए १६ ऑगस्ट १९४६ में आतंकवादी मुहम्मद अली जिन्नाह ने डायरेक्ट एक्शन डे के ऐलान किया। उसने कहा “मुझे विभाजित भारत चाहिए नहीं तो पुरे भारतको ख़त्म कर दूंंगा”।  मुस्लिमोंने किये हिंसामे पांच हजार से ज्यादा हिंदू मारे गए। १ लाख से ज्यादा लोक बेघर हो गए। हिन्दू गोपाल पाठाने कुछ हिंदुओंको एकत्र कर इसका पूरा विरोध किया तभी जाकर ये हिंसा रुकी। इन हिंसाकी बजह से पुरे देशमे हिंसा शुरू होगयी थी। इसीसे भारताका विभाजन शुरू हुआ ,ऐसा कह सकते है।

  

डायरेक्ट एक्शन डे में हुयी हिंसा का एक दृश्य 

४) १९४७ मीरपुर हिंदू हत्याकांड-

          पाकिस्तानके सहयोग से मुस्लिम हत्यारोने और स्थानीय मुसलमानोने कश्मीरके मीरपुरमें बीस ते तीस हजार हिंदुओंकी और सिखोंकी हत्या करदी और  पांच से दस हजार हिंदू महिलाओंका अपहरण किया। इन हिंदू स्त्रियोंपर नृशंस अत्याचार किये और धर्मांतर किया गया। फिर भी भारत की तरफ से उनको हिंदुओंको मदद नहीं मिली। इस अत्याचार से पहले मीरपुर में १ लाख १४ हजार हिंदू और सिख थे। उसमेसे बस ७९० हिंदू और सिख बचे रहे , इस आंकडेसे हमें इस अत्यचारकी बर्बरता का अंदाजा आता है। ९० हजारसे भी ज्यादा हिंदुओंने मीरपुरसे पलायन किया।  

आतंकवादी मुहम्मद अली जिन्नाह

५) `१९७१ बांग्लादेश हिंदू हत्याकांड –

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१९७१ में हुए हिन्दू नरसंहार का एक दृश्य 

१९७१ में  पूर्व पाकिस्तानमे पाकिस्तानकी सेनाने बेंगाली हिंदुओंका नृशंस नरसंहार किया। इसे दुनिया के सबसे बड़े नरसंहारमें से एक माना जाता है। कमसे कम बीस लाखसे ज्यादा हिन्दुंओंकी हत्या पाकिस्तानकी सेनानी और स्थायिक मुसलमानोने की, वही दो से चार लाखके बीच  हिंदू महिलाओंपे बलात्कार और अत्याचार हुए।एक अमीरकी अफसरने इस नरसंहार की तुलना नाज़ियोने पोलैंडमें किये हुए नरसंहारसे की। 

इतने अत्याचार के बाद भारतने अपनी सेना भेजकर पूर्व पाकिस्तानको स्वतंत्र किया। पर विडंबना देखिये , की पाकिस्तानकी ९२ हजार सेना को भारत की पंतप्रधान इंदिरा गाँधी ने छोड़ दिया ,जिसने २० लाख सभी ज्यादा हिंदुओंकी बर्बरता से हत्या की। भारतकी इस दयाभरे रवैये के कारण इस हत्याकांड के जिम्मेदार लोकोंको सजा नहीं मिली। आखिर में बस पाकिस्तान सेनाके बस चार लोगोंको फांसी की सजा मिली। 

६) हैदरबादमें हिंदुओंका नरसंहार 1948 –

हैदरबादके तबके राजा निजाम था  पर, हिंदू बहुसंख्यांक थे। निजाम भारतमें शामिल नहीं होना चाहता था। उसने रजाकारोंकी मुसलमानी  सेनाको  हिंदुओंकी आवाज दबाने के लिए भेजी। रजाकारोंने वहाके बहुसंख्यांक हिंदुओंपर घिनौने अत्याचार किये। बहुत बड़ी संख्या में हिंदुओंकी हत्याएं हुयी और हिंदू महिलाओंपे अत्याचार हुए। तब भारतने सेना भेजकर हैदराबादको निजामसे मुक्त कराया। सत्ताईस से चालीस हजार तक लोकोंगी इस हैदरबाके मुक्तिसंग्राममें जाने गयी , उसमे ज्यादातर हिंदू ही थे।  

७) १९५० पूर्व पाकिस्तान हिंदू हत्याकांड

पूर्व बंगाल जो १९४७ में पाकिस्तानमें शामिल किया गया था ,वहाँपे पाकिस्तान पोलिस और स्थायिक मुसलमानोने हजारो हिन्दुओंपे बर्बर अत्याचार किये। पश्चिम बंगालके मुख्यमंत्री के नुसार बीस लाख बेंगाली हिंदू पूर्व पाकिस्तानसे भागके पश्चिम बंगालमें आये। कुछ इतिहासकोरोंका मानना है की पैंतीस से पचास लाख हिंदू पूर्व पाकिस्तानसे पश्चिम बंगाल आये और पांच लाख हिंदुओंकी पूर्व पाकिस्तानमे हत्याएं हुयी। भारतके तत्कालीन पंतप्रधान जवाहरलाल नेहरूने पूर्व पाकिस्तानकी हिन्दुओंपे नृशंस अत्याचारोंके समाजर देने से समाचार  पत्रोंको मना  किया था, ताकि इससे भारतमे हालत न बिगड़े। इसी दौरान पाकिस्तानके संस्थापक और क़ायदामंत्री जोगेंद्रनाथ मंडल पूर्व पाकिस्तानमे हिन्दुओंपे हो रहे अत्यचारोंको देखकर पाकिस्तानसे भागके पश्चिम बंगाल आये।किसी भी मुसलमान अत्याचार करनेवालेको पूर्व पाकिस्तानमे सजा नहीं मिली।

भारतीय जनसंघ संथापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी हिन्दू निर्वसितोका दर्द सुनते हुए।  

८)१९६४ पूर्व पाकिस्तान हिंदू हत्याकांड 

१९६४ में पूर्व पाकिस्तानमें १५ हजारसे ज्यादा हिंदुओंकी हत्याये की गयी। राजशाहीके एक विद्यालय में हजारो हिंदुओंने शरण ली थी , मगर   मुसलमानोने वो विद्यालय नृशंस तरीके से जला दिया। ऐसे अनेक अत्याचारोंके बाद दो लाख से भी ज्यादा हिंदू और आदवासीयोने भारत में शरण ली। किसी भी मुसलमान अत्याचारियोंको पूर्व पाकिस्तानमे सजा नहीं मिली।  

हिन्दू निर्वासित 

९) कश्मीर १९९० हिंदू हत्याकांड – 

बस तीस साल पहले स्वतंत्र भारत में हिंदुओंका और एक हत्याकांड मुसलमानोने किया। मुसलमानोने १३४१ हिंदुओंकी हत्याएं की और कई हिंदू महिलाओंपर बलात्कार हुये। इसके पश्चात षह से सात लाख हिंदुओंने कश्मीर से पलायन किया। कश्मीरी हिंदू लोकसंख्या इससे बहुत कम होगयी।किसी भी मुसलमान आक्रमणकारियों भारत की न्यायालयने सजा नहीं दी। अभी भी कश्मीरमें हिंदुओंकी हत्याएं जारी है और भारत सरकार और भारतीय सर्वोच्च न्यायालय इसको अनदेखा कर रहे है।

  

कश्मीर में हिंदुओंकी हत्या 

१०) १९४७ भारतके विभाजन का हत्याकांड 

आतंकवादी मुहम्मद अली जिन्नाह और सारे भारतीय मुसलमानोने भारत तोड़कर पाकिस्तानका निर्माण किया, इसी में मुसलानोने बहुत बड़ी हिंसा की।पाकिस्तानसे रेल गाड़िया हिंदू और सिखोंके लाशोंसे भरके भारत आती थी। बीस लाख से ज्यादा हत्याएं भारत के विभाजन के समय हुयी। एक लाख से भी ज्यादा महिलाओंका अपहरण हुआ।दो करोडसे भी ज्यादा लोगोंको अपनी मूल जगह से भागना पड़ा। हिंदू और सिख भारत की विभाजन कही भी जिम्मेदार नहीं थे ,फिर भी उन्हें ज्यादातर अत्याचार सहने पड़े।  

११) अफगानी हिंदू और सींखोपे अत्याचार 

१९७० में अफ़ग़ानिस्तान मूलके ७ लाख हिंदू और सिख अफ़ग़ानिस्तानमें रहते थे , अभी वहापे एक हजार से भी कम हिंदू या सिख बचे है।उनपर वहां के मुसलमानोने और तालिबानी आतंकवादियोने बहुत अत्याचार किये तभी आखिरी पचास सालोमे सभी सात लाख हिंदू और सिख भारत भाग गए है।

 १२) बांग्लादेश में हिन्दुओंपे अत्याचार 

बाँग्लादेश में अभी दो महीने पहले १०० हिंदू मंदिर मुसलमानोंद्वारा तोड़े गए। बांग्लादेश में हिन्दुओंपे अत्याचार इस देश के निर्माणसे ही हो रहा है। बाँग्लादेश में अभी एक करोड़ ३० लाख के करीब हिंदू रहते है। बंगलदेश में हिंदुओंकी संख्या लगातार घट रही है। १९७४ में बांग्लादेश में जो हिंदू १३.५० प्रतिशत थे, जो मुसलमानोंके अत्याचार के बजह से अभी बस ८.५४ प्रतिशत रह गए है। एक इतिहासकार के नुसार बांग्लादेश से पिछले चालीस सालोमे एक करोड़ और दस लाख हिंदू भारत भाग गए।  

अजमेर दरगाह बलात्कार कांड 

१९९२ में राजस्थानमें अजमेर की प्रसिद्ध अजमेर दरगाह के खादिम फारुख चिश्ती और उसके साथियोने ने 

तीन सौ से भी ज्यादा हिंदू लड़कियोंके बलात्कार किये, उन्हें धमकी देकर उनका शोषण किया गया। इसमें काफी बड़े घर की लडकियोंको  टारगेट किया गया था।  इसमें छह हिंदू लडकिँयोने आत्महत्या की।ये बलात्कार कांड भारतके सबसे बड़े स्त्रियोंपर अत्याचार का उदहारण माना जाता है। 

अजमेर दरगाह

वही मुसलमानोने भारतके स्वतंत्र सेनानी गणेश शंकर विद्यार्थी और स्वामी श्रद्धानन्द की भी हत्याएं की है।वही उन्होंने “रंगीला रसूल ” ये पुस्तक प्रकाशित करने वाले राजपाल महाशय और आर्य समाजी पंडित लेखराम की भी हत्याएं की थी। वही आज भी पाकिस्तान में हर साल कम से कम  १००० हिंदू लड़कियोंका अपहरण और धर्मान्तरण होता है। 

स्वतंत्र सेनानी स्वामी श्रद्धानन्द 

 इतने बड़े नरसंहार झेलने जे बावजूद भारत में हिंदुओंके के सरंक्षण के किये कोई प्रावधान नहीं किया गए है। वही भारत में मुस्लिम पिछले ७० वर्षो में साढ़े तीन करोडसे २१ करोड़ बन चुके है। 

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