जम्मू में निरुद्ध रोहिंग्याओं को रिहा किया जाए :प्रशांत भूषण

इस देश में जब भी उपद्रवियों , दंगाइयों , घुसपैठियों और यहाँ तक कि आतंकियों पर कोई भी कार्रवाई होगी ,इन्हें बचाने के लिए एक विशेष समूह के लोग अलग अलग तरीके के उपायों में लग जाते हैं . तो जैसा कि संभावित ही था कि जम्मू कश्मीर में सरकार , पुलिस व फौज द्वारा पहचान कर निरुद्ध किए गए रोहिंज्ञाओं पर कार्रवाई शुरू हुई अदालत की अवमानना का दंड झेल चुके अधिवक्ता प्रशांत भूषण ,रोहिंज्ञाओं की तरफ से दायर याचिका में रोहिंज्ञाओं को तुरन्त रिहा करने और उन्हें देश से बाहर न भेजे जाने की मांग की है
25 मार्च को सूचीबद्ध की गई इस याचिका में कहा गया है कि जम्मू में सरकार /पुलिस की निगरानी में डिटेंशन केंद्रों में निरुद्ध किए गए रोहिंज्ञाओं को रिहा किया जाना चाहिए . इतना ही नहीं , माँग की गई है कि इन्हें वापस भेजे जाने प्रक्रिया पर भी तुरंत रोक लगाई जाए क्योंकि ये सभी बांग्लादेश , म्यांमार से भाग आर आए “शरणार्थी ” हैं और वापस अपने देश जाने पर इनकी जान का खतरा हो सकता है .
यहाँ गौरतलब तथ्य यह है कि गृह मंत्रालय को खुफिया तंत्र , सुरक्षा एजेंसियों तथा स्थानीय पुलिस द्वारा दिए गए इनपुट कि ये तमाम घुसपैठिए अपनी पहचान छिपा कर या नाम बदल कर देश भर में घट रहे विभिन्न आपराधिक कृत्यों में शामिल हैं . अब एक दूसरी जरूरी बात ये कि याचिका दायर करने वाले प्रशांत भूषण शायद ये भूल चुके हैं कि जिस जम्मू कश्मीर में रोहिंज्ञाओं को खुला छोड़ देने की माँग की जा रही है वो तथा भारत के सभी सीमा क्षेत्रों पर आतंकवाद एक बहुत बड़ी समस्या है .
सबसे अहम बात ये है कि इस तरह की याचिका लगाने वाले लोग -सेना ,पुलिस और सुरक्षा बलों में तैनात देश के सपूतों की ज़िंदगी और जान देकर भी देश देशवासियों को सुरक्षित रखने के जज्बे का सरासर अपमान नहीं कर रहे हैं क्या ??
आज विश्व भर में इन मुगलिया शरणार्थियों द्वारा किसी भी देश में घुस कर उस देश में हिंसा , आतंकवाद के सहारे पूरे देश को खतरे में डालने की प्रवृत्ति को देखते हुए भारत -जो पहले ही चारों ओर से पाकिस्तान , चीन और बांग्लादेश जैसे धूर्त देशों से घिरा हुआ है तो ऐसे में क्या बाहरी अशांति और खतरे के साथ साथ देश के अंदर भी नए खतरे पनपाते रहें क्या ???
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