लेख की पहली कड़ी में आपने महान क्रांतिकारी खुदीराम बोस के बारे में पढ़ा था, आज इसकी दूसरी कड़ी में हम जानेंगे भारत माँ के उस सपूत के बारे में जिन्होंने अंग्रेजों के हाथों खुद को समर्पण करने की बजाय मौत को हंसते हंसते गले लगा लिया।

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उन महान क्रांतिकारी देशभक्त का नाम है – श्री प्रफुल्ल चाकी। मात्र 19 वर्ष की आयु में इन्होंने अपना जीवन इस राष्ट्र के लिए समर्पित कर दिया और स्वयं अपने हाथों से खुद को गोली मार ली ताकि अंग्रेज इन्हें जिंदा ना पकड़ सके।

10 दिसंबर 1888 को तत्कालीन बंगाल प्रान्त के बोगरा जिले (वर्तमान बांग्लादेश) में इनका जन्म हुआ।
बचपन से ही स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रभावित होकर राष्ट्र प्रेम की भावना इनकी रगों में दौड़ रही थी।
खुदीराम बोस की तरह ये भी 9वीं कक्षा के बाद पूरी तरह अंग्रेजों के विरुद्ध राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय हो गए थे।

खुदीराम बोस के साथ प्रफुल्ल चाकी को उस समय के क्रूर जज किंग्सफोर्ड को मारने की अहम जिम्मेदारी दी गयी, लेकिन दुर्भाग्यवश किंग्सफोर्ड नही मारा गया और योजना असफल हो गई।
अंग्रेजों से बचने के लिए खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी अलग अलग भागने की योजना बनाते है।
प्रफुल्ल चाकी समस्तीपुर पहुँचकर कपड़े बदलते है और टिकट लेकर ट्रेन में बैठ जाते है।
उसी ट्रेन में पुलिस सब इंस्पेक्टर नंदलाल बैनर्जी भी बैठा हुआ था, उसे प्रफुल्ल चाकी पर शक हुआ और प्रफुल्ल चाकी को गिरफ्तार करने की सूचना उसने चुपचाप अगले स्टेशन पर पहुँचा दी।
जैसा ही अगला स्टेशन आया तो वो और उसकी टीम प्रफुल्ल चाकी को गिरफ़्तार करने की कोशिश करती है, प्रफुल्ल चाकी ने भागने का प्रयास किया लेकिन जब उन्हें लगा कि वो चारों तरफ से पुलिस से घिर गए है तो उन्होंने स्वयं ही गोली मारकर अपना जीवन समाप्त कर लिया।
इस तरह एक और पुष्प मात्र 19 वर्ष की आयु में मां भारती के चरणों में समर्पित हो गया।

अफ़सोस की बात ये है कि माँ भारती के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले इन युवा देशभक्तों के योगदान की उस समय गांधी के द्वारा आलोचना की गई।
गांधी ने कहा कि, “The indian people will not win their freedom through these methods”.
यही नही गांधी ने मुजफ्फरनगर बम कांड में मारे गए अंग्रेजों की मौत पर दुःख भी जताया।

खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी ने इस देश की आज़ादी के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया, उनके इस अमूल्य योगदान का ये देश सदैव ऋणी रहेगा और देश ये भी याद रखेगा कि किस प्रकार आज़ादी के असली नायकों को गुमनामी में रखा गया।
जय हिंद ????
वन्देमातरम ????

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