पंडित दीनदयाल उपाध्याय और एकात्म मानवदर्शन

विश्व-बंधुत्व की भावना को साकार करता एकात्म मानवदर्शन और पंडित दीनदयाल उपाध्याय सरलता और सादगी की प्रतिमूर्त्ति पंडित दीनदयाल उपाध्याय बहुमुखी एवं विलक्षण प्रतिभा...

”परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम……….!”

”परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम……….!” सत्य, अहिंसा, करुणा, प्रेम आदि शाश्वत भाव हैं और किसी भी सभ्य समाज में इन मूल्यों को पालित-पोषित करने...

बड़ी अस्मिता को राजनीति के केंद्र में स्थापित करने वाले जननेता- कल्याण सिंह

कल्याण सिंह का देहावसान राजनीति के एक युग का अंत व अवसान है। वे भारतीय राजनीति के शिखर-पुरुष के रूप में सदैव याद आएँगें।...

मतांतरण केवल आस्था-विश्वास-उपासना पद्धत्ति का ही रूपांतरण नहीं, राष्ट्रांतरण भी है।

सर्वसाधारण ही नहीं, अपितु पढ़ा-लिखा वर्ग भी बहुधा मत, संप्रदाय, मज़हब, रिलीज़न आदि को ‘धर्म’ का पर्याय मानने की भूल कर बैठता है। वस्तुतः...

इस्लामिक देशों में बदलाव की बयार और भारत में जगती उम्मीदें 

इस्लामिक देशों में बदलाव की बयार और भारत में जगती उम्मीदें परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत नियम है। युगीन आवश्यकता एवं वर्तमान परिस्थिति-परिवेश के अनुकूल...

राष्ट्रीय-जीवन में छत्रपति शिवाजी का ऐतिहासिक अवदान

23 जून, हिंदू साम्राज्य-दिनोत्सव (शिवाजी का राज्याभिषेक) पर यह सरलीकृत निष्कर्ष एवं कुप्रचार है कि विदेशी आक्रांताओं का हम साहस-संघर्ष के साथ सामना नहीं...

इक्कीसवीं सदी योग-आयुर्वेद एवं भारतीय ज्ञान-विचार-परंपरा की सदी

निःसंदेह योग एवं आयुर्वेद को देश-दुनिया तक पहुँचाने में स्वामी रामदेव का योगदान अतुल्य एवं स्तुत्य है। उन्होंने योग और आयुर्वेद को गुफाओं-कंदराओं, शास्त्र-संस्थाओं...