चीफ डिफेंस बिपिन रावत का जाना देश के लिए कितनी बड़ी अपूरणीय क्षति है इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है । नेतृत्व धैर्य और अनुभव की तपती हुई अग्नि से निकले बिपिन रावत देश के लिए वह महत्वपूर्ण स्तंभ थे जो रणनीति के हर मोर्चे पर सेना को गाइड करने के लिए काम आते थे। बिपिन रावत की ठहरी हुई सूझबूझ और नेतृत्व क्षमता इतनी सघन थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रावत पर अजीत डोभाल की तरह ही भरोसा करते थे।

चीन के साथ चल रहे विवाद में बिपिन रावत एकदम स्पष्ट थे और वह चीन को भारत का बड़ा रणनीतिक शत्रु बताते थे। यह जनरल बिपिन रावत ही थे जिन्होंने कहा था कि भारतीय सेना एक साथ ‘ढाई मोर्चे’ पर युद्ध लड़ रही है। बिपिन रावत को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि देश की जनता इस बात को समझें कि एक मोर्चा चीन दूसरा मोर्चा पाकिस्तान है तो यह ‘आधा मोर्चा’ कौन है? आखिर जनरल बिपिन रावत किस आधे मोर्चे का जिक्र कर रहे थे जब उन्होंने कहा था कि देश की सेना एक साथ ढाई मोर्चे पर लड़ने के लिए तैयार है।

जनरल बिपिन रावत अपने बयानों में इतने दिलेर थे कि उन्होंने सीधे तौर पर जिस आधे मोर्चे का जिक्र किया था ।अगर हम इसकी गहराई समझ सके तो हम समझ पाएंगे कि देश में छुपे हुए वह तमाम गद्दार जो भारत में अंतरिक्ष उथल-पुथल मचाना चाहते हैं यह सभी लोग वह आधा मोर्चा हैं। समय रहते हुए देश की जनता को इन आधे मोर्चे वाले दुश्मनों के लिए ज्यादा सजग रहने की जरूरत है, यही जनरल बिपिन रावत को हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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