2022 का अभी आधा साल ही गुजरा है लेकिन लेकिन हाल के दो तीन महीनों से जिस तरह से हिंदुओं को, उनके मंदिरों को, देवी-देवताओं को कट्टरपंथियों की तरफ से निशाना बनाया गया है उसकी अब हद हो गयी है. शुक्रवार को एक बार फिर देश को जलाने की कोशिश की गयी, जो डरावना मंजर दिखा उसे देखकर कुछ समय के लिए मानो लगा यहां तालिबानियों का राज चल रहा है. रामनवमी और हनुमान जयंती के मौके पर भी दंगे हुए और इन दंगों में भी हिंदु श्रद्धालुओं को निशाना बनाया गया था, लेकिन तब किसी हिंदु ने हाथों में पत्थर नहीं उठाया, सड़कों पर आगजनी नहीं की. किसी तरह का कोई विरोध प्रदर्शन नहीं हुआ. क्योंकि हिंदु समुदाय के लोग आज भी कानून व्यवस्था को मानते हैं उनके लिए धर्म से उपर देश और उस देश का संविधान है.

लेकिन जब 2001 में संसद भवन पर हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी हुई तब हमारे देश में एक खास समुदाय के लोग इसी तरह से सड़कों पर उतर आए थे. वहीं 2008 के मुंबई ब्लास्ट में कितने लोगों ने जान गवायी थी. वो जख्म आज भी मुंबईकर के दिलों में ताजा है . बावजूद इसके हमारे देश में आतंकवादियों और इस्लामिक कट्टरपंथियों के खिलाफ कोई विरोध प्रदर्शन नहीं हुआ . फिर मुंबई हमलों के दोषी अजमल कसाब को जब फांसी हुई थी तब उस समय फिर हमारे देश के मानवाधिकार की दुहाई देकर इस पर सवाल उठाए थे. वहीं अकबरुद्दीन ओवैसी का वो नफरती बयान आपको याद होगा जिसमें उन्होंने कहा था कि 15 मिनट के लिए पुलिस हटा लो तो हम बता देंगे. इस भाषण के कुछ ही दिनों बाद कानून ने अपना काम करते हुए अकबरुद्दीन ओवैसी को गिरफ्तार किया था. मतलब कानून ने अपना काम किया था. देश के 100 करोड़ हिन्दू अकबरुद्दीन ओवैसी की गिरफ्तारी के लिए सड़कों पर नहीं उतरे थे ना ही फांसी का मांग की थी और ना ही हाथों में पत्थर उठाकर पुलिस वालों पर बरसाए थे,.  लेकिन आज यही लोग नुपुर शर्मा के लिए फांसी की मांग कर रहे हैं .

दिल्ली के जहांगीरपुरी में हनुमान जयंती के दौरान जो हिंसा हुई थी उस मामले में भी खुलासा हुआ कि हनुमान जयंती पर दंगे भड़काने की साजिश कोई संयोग नहीं था. ये सब एक सुनियोजित साजिश थी बावजूद इसके हिंदुओं ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन नहीं किया. क्योंकि देश के हिंदु आज भी कानून व्यवस्था को मानते हैं.

लेकिन इन सबके बीच हमें ये भी समझना होगा कि हम सिर्फ सरकार के भरोसे नहीं बैठ सकते, सरकार और कानून अपने तरीके से कार्रवाई करेगी लेकिन हमें अपनी सुरक्षा के लिए तैयार रहना होगा. सबकुछ सरकार के भरोसे छोड़कर हम सोते नहीं रह सकते. क्योंकि हम जितना सोते रहेंगे, उतना खोते रहेंगे.

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