असम के शिक्षा मंत्री हेमंत बिस्व सरमा के मुताबिक नवंबर में सरकार अधिसूचना जारी कर देगी और सरकारी सहायता से चलने वाले सभी मदरसे बंद कर दिए जाएंगे –

हेमंत बिस्व सरमा ने कहा ”मेरी राय में कुरान का शिक्षण सरकारी धन की कीमत पर नहीं हो सकता है – अगर हमें ऐसा करना है तो हमें बाइबल और भगवद गीता दोनों को भी सिखाना चाहिए –

ऐसे मदरसों के संख्या राज्य में 614 बताई गई है -AIUDF चीफ बदरुद्दीन अजमल ने धमकी दी है कि अगर भाजपा सरकार ने मदरसे बंद किये तो अगले चुनाव में उनकी सरकार बनने के बाद फिर वो मदरसे खोल दिए जायेंगे –

दरअसल संविधान के अनुच्छेद 30 ने पैदा किया है देश में “अल्पसंख्यकवाद” का लाईलाज कोढ़ और जिसके कारण माइनॉरिटी वोट बैंक बना, जिसने आज देश को फिर विभाजन करने वालों को हवा दी है –कांग्रेस ने तो देश की आज़ादी के दिन से दूसरे विभाजन का लक्ष्य तय कर लिया था जिसमें वो सफल हो रहे हैं —

“अनुच्छेद 30 कहता है देश के अल्पसंख्यक समुदायों को (चाहे वो धार्मिक हों या भाषाई) अपने मनपसंद शिक्षण संस्थानों को स्थापित करने और चलाने का अधिकार होगा”

“अनुच्छेद 30 1(A) कहता है कि ऐसे शिक्षण संस्थाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के लिए केवल इसीलिए भेदभाव ना हो कि वो माइनॉरिटी समुदाय के हैं” –और

“अनुच्छेद 30 (2) कहता है कि राज्य सरकार शिक्षण संस्थाओं को अनुदान देते समय ये ध्यान रखेगी कि माइनॉरिटी संस्थाओं के साथ कोई भेदभाव ना हो” –

संविधान के इन प्रावधानों में कहां कहा गया है कि राज्य सरकार के लिए अल्पसंख्यक कौमों के शिक्षण संस्थाओं को अनुदान देना जरूरी है और ये अनुदान प्राप्त करना उनका मौलिक अधिकार है –उन्हें संविधान ने अपने शिक्षण संस्थान स्थापित करने और चलाने का अधिकार दिया तो अपने पैसे से कीजिये –

वक्फ बोर्डों के पास पैसे की क्या कोई कमीं है –लेकिन कांग्रेस सरकारों ने मदरसा उद्योग को सरकारी पैसे पर पलने वाला सफ़ेद हाथी बना दिए –यहां तक अनेक मंदिरों की धनराशि निकाल कर राज्य सरकारें मस्जिदों और मदरसों में खर्च करती रही है -और मजे की बात है अदालतें कुम्भकरण की नींद में सोती हैं –

कांग्रेस और उससे पैदा हुए अन्य दलों की सरकारों की वजह से संविधान का अनुच्छेद 30 “अल्पसंख्यकवाद” का कोढ़ बन गया –आज केवल भाजपा को छोड़ कर सभी दल मुस्लिम वोट बैंक के पीछे पड़े रहते हैं जिसके लिए वो हिन्दुओं का किसी हद तक विरोध कर सकते हैं —

असम सरकार के इस कदम पर राजनीतिक बवाल तो मचना तय था और मच रहा है – इसके अन्य पहलुओं पर अगले लेख में लिखूंगा जल्दी ही –

बस आज इतनी जानकारी और दे दूं कि वो सरकारी धन पर मदरसे चलाना चाहते हैं, मगर केंद्रीय विद्यालयों में ये प्रार्थना का संविधान के अनुच्छेद 28 (1) में गायन उचित है या नहीं, फैसला संविधान पीठ करेगी –

ॐ असतो मा सद्गमय ।
तमसो मा ज्योतिर्गमय ।
मृत्योर्मा अमृतं गमय ।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः

ये आदेश सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस आर ऍफ़ नरीमन और जस्टिस विनीत सरन की पीठ ने 28 जनवरी, 2019 को मध्य प्रदेश के एक वामपंथी अध्यापक विनायक शाह की याचिका पर दिए -अभी पता नहीं संविधान पीठ गठित हुई या नहीं -मगर ये ध्यान देने वाली बात है कि 2 जज हमारे धर्म ग्रंथों को चुनौती दे रहे हैं –

(सुभाष चन्द्र)
“मैं वंशज श्री राम का”
15/10/2020

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