दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन को कांग्रेस ,आम आदमी पार्टी, लोकदल, लिबरल मीडिया ,वामपंथी संगठन शाहीन बाग गैंग, PFI जैसे तमाम संगठन ताकत देने में जुटे हैं। कांग्रेस पार्टी ने साम-दाम-दंड-भेद के आधार पर सरकार के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाने के लिए इस किसान आंदोलन में अपनी पूरी पार्टी की ताकत को झोंक दिया, मगर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल किसान आंदोलन में शामिल क्या हुए अंदर खाने इस आंदोलन में फूट पड़ने की खबरें सामने आ रही हैं।


पंजाब में अपने बेस को मजबूत करने के लिए आम आदमी पार्टी ने भी इस किसान आंदोलन में कांग्रेस के समकक्ष अपनी पूरी ताकत लगाई है और दिल्ली में भी केजरीवाल सरकार पूरी तरह इस आंदोलन को मदद मुहैया करा रही है। ऐसे में किसान आंदोलन के मंच को हड़पने के लिए दोनों ही पार्टियों में अंदर खाने की खींचतान चल रही थी और अब यह इस कदर बढ़ गई है कि कांग्रेस ने इस आंदोलन से पीछे हटने का मन बना लिया है। 


सूत्रों के मुताबिक पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह किसान आंदोलन में आम आदमी पार्टी के बढ़ते दखल से खासे नाराज हैं और उन्होंने इसकी रिपोर्ट कांग्रेस आलाकमान को भी दी है। केजरीवाल सरकार ने जिस तरह से पूरे आंदोलन को हाईजैक कर लिया है उसे देखते हुए कांग्रेस ने अपने संसाधनों को इस आंदोलन में झोंकने से परहेज करना शुरू कर दिया है।


सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस से जुड़े हुए कई नेताओं ने किसान संगठनों से बातचीत की कि वह अपने मंच से आम आदमी पार्टी को दूर रखें मगर किसान संगठनों ने ऐसा नहीं किया तो कांग्रेस ने इस आंदोलन से अपने हाथ पीछे खींचने का मन बना लिया है। ये तो तय था कि मोदी विरोध के नाम पर एकजुट हुए इन तमाम संगठनों की नफरत से भरी जुगलबंदी सारा दिन तक चलने वाली नहीं है मगर यह घड़ा इतनी जल्दी टूटेगा इसका अंदाजा नहीं था।

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