कैसे आंदोलनकारी हो रे खालिस्तानी खरगोशों :जेल जाने से बचने के लिए चूहे के बिल में छिप गए?

बचपन से जैसे एक झूठ को बार बार रटाया जाता रहा है कि “दे दी हमें आजादी बिना खड्ग बिना ढाल ” (वैसे जिनकी...

शहरी नक्सल को ऐसे पहचानिए

वामपंथी इतिहासकार रोमिला थापर ने सरकार से ‘शहरी नक्सली’ शब्द को परिभाषित करने की मांग की है। कमाल देखिये की अपने आपको बुद्धिजीवी कहलवाने...

कैंसर पीड़ित माँ को देखने जा रही दो बहनों का सामूहिक बलात्कार :सभी आरोपी हैं मुग़ल हैवान

एक बार फिर से इंसानियत को तार तार करते हुए कुछ मुग़ल हैवानों ने कैंसर पीड़ित माँ को अस्पताल में देखने जा रही दो...