दिल्ली में मौजूदा केजरीवाल सरकार की शिक्षा प्रणाली बद से बदतर होती जा रही है. ये बताने की जरुरत नहीं है कि किस तरह से केजरीवाल सरकार ने ढिंढोरा पीट-पीटकर ये देश के सामने दिखाया है कि दिल्ली की शिक्षा वर्ल़्ड क्लास है. लेकिन झूठ की बुनियाद पर टिकी दिल्ली की शिक्षा प्रणाली की पोल आखिरकार खुल ही गई. केजरीवाल ने जिस तरह से जनता की आंखों पर पट्टी बांधकर मूर्ख बनाया है वो सच्चाई सामने आने लगी है कि किस तरह से मुख्यमंत्री केजरीवाल जी हमारे छात्रों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

दरअसल दिल्ली की केजरीवाल सरकार जिन सरकारी स्कूलों को वर्ल्ड क्लास बताकर अपनी पीठ थपथपाती है उन्हीं स्कूलों पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग यानि NCPCR ने सवाल उठा दिए हैं। आयोग ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली के 1,027 स्कूलों में सिर्फ 203 ऐसे स्कूल हैं जिनमें प्रिंसिपल हैं। जिसे लेकर दिल्ली सरकार से आयोग ने एक हफ्ते के अंदर 19 अप्रैल तक जवाब मांगा है.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने दिल्ली के मुख्य सचिव विजय कुमार देव को मंगलवार को पत्र लिखकर कहा कि NCPCR की टीम ने जब दिल्ली के सरकारी स्कूलों का दौरा किया तो पाया कि दिल्ली के कई सरकारी स्कूलों में हेडमास्टर या प्रिंसिपल थे ही नहीं और जगह खाली थी. एनसीपीसीआर के मुताबिक दिल्ली के कुल 1,027 सरकारी स्कूलों में से सिर्फ 203 स्कूलों में ही प्रिंसिपल या हेडमास्टर थे, जिसमें से 3 में एक्टिंग हेडमास्टर, 9 में हेडमास्टर और 191 में प्रिंसिपल मौजूद थे. दिल्ली सरकार को लिखे अपने पत्र में एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने स्कूलों में प्रिंसिपल और हेडमास्टर की अहम भूमिका बताते हुए लिखा कि प्रधानाचार्य स्कूल में पढ़ाई का सकारात्मक माहौल सुनिश्चित करते हैं. वहीं प्रधानाचार्य या हेडमास्टर के नहीं होने से बच्चों की सुरक्षा पर विपरीत असर पड़ता है.

बता दें आपको पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ‘अत्याधुनिक’ तकनीक के साथ स्मार्ट क्लास की तस्वीरों के साथ कई विज्ञापन निकाले थे उन्होंने 12,430 मॉडल क्लास का ‘उद्घाटन’ करने का दावा किया था लेकिन दिल्ली के स्कूलों की सच्चाई विज्ञापन में कुछ और दिखाई जाती है और धरातल पर इसकी सच्चाई तो कुछ और ही है.

दिल्ली में शिक्षा प्रणाली को बदलने के आम आदमी पार्टी सरकार के दावे पीआर और झूठे दावों पर आधारित हैं, जो पहले भी सामने आ चुके हैं. बावजूद इसके दिल्ली सरकार शिक्षा व्यवस्था में क्रांति लाने का दावा करती है। सच तो ये है कि फ्री-फ्री के चक्कर में केजरीवाल ने दिल्ली के शिक्षा के मॉडल को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है जिससे बच्चों के सुनहरे भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं.

 

 

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