“कुछ भी करने का ,खुदा का ईगो hurt नई करने का “

इस मासूम दुनिया को आखिर कब ,आखिर कितने दंगे फसादों , कितने आतंकी हमलों ,तकरीरों ,फतवों के बाद जाकर एहसास होगा कि खुदा बहुत ही ज्यादा fragile हैं , बोले तो नाज़ुक , कोई भी कब्बी भी खुदा के अगेंस्ट नहीं बोलने लिखने का | डेनमार्क भूल गए ,एक कार्टून का चित्रांकण से लेकर बहुत सालों बाद उसके प्रकाशन करने वाले अखबार तक को इस गुनाह-ए-अजीम के लिए अपनी जान तक देनी पड़ी थी |
ये तो कुरान की शान्ति का पैगाम ही है जो ईश निंदा की प्रतिक्रया में ये शान्ति दूत सम्प्रदाय मात्र छोटे बड़े दंगे , हिंसा ,लूट ,आगजनी ,तोड़फोड़ आदि जैसे कदमों का सहारा लेते हैं नहीं तो खुदा के खिलाफ जाने सोचने बोलने कहने वाले को तो इस पूरी कायनात में रहने का ही कोई हक़ नहीं | हाँ बार बार आपको ध्यान ये दिलाया जा रहा है कि ऐसा सिर्फ और सिर्फ खुदा के मामले में ही ये एप्लीकेबल होगा/होता है |
हिन्दू देवी देवताओं ,प्रतीकों ,आस्थाओं तक को भला बुरा कहना ,गाली देना ,उपहास और मजाक का विषय बनाना , जूते चप्पल से लेकर अन्तः वस्त्रों तक पर उनका चित्रण करना ये सब करने रहने से कभी भी किसी को भी न तो ये डर सताता है कि इन सबके बदले में उसे ,उनके मकान दूकान को फूँक डाला जा सकता है | हिन्दू ठहरे आखिर सहिष्णु प्राणी ,क्या होगा ज्यादा से ज्यादा कहीं विरोध स्वरूप कुछ लिख बोल देंगे ,मगर दंगे करना शहरों को जला कर राख कर देना ,इतनी काबलियत और कलेजा नहीं है हिन्दुओं में |
ऐसे में हिन्दू ,सिक्ख ,ईसाई ,यहूदी ,पारसी आदि जितने भी गैर मुस्लिम धर्म पंथ हैं सबको और सबके अनुयायियों को ये बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि चाहे मकबूल फ़िदा हुसैन ,अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में माँ सरस्वती का नग्न चित्र बना दे , चाहे राहत इंदौरी और मुनव्वर राणा जैसे स्वघोषित मिर्ज़ा ग़ालिब लोग शायरी और गजल गायकी के बहाने से दूसरे धर्म और दूसरे सभी लोगों को कोसते गलियाते रहें ,और चाहे इससे भी ज्यादा कुछ होता रहे मगर चूंकि सिर्फ और सिर्फ खुदा ही fragile (नाजुक ) हैं ,इसलिए इनके मामले में कुछ भी कहा सुना देखा नहीं जा सकता नहीं तो बाद में दंगे ,ह्त्या ,लूट आदि ही देखने को मिलता रहेगा दुनिया को |
बंगलौर में कांग्रेस के विधायक के एक रिश्तेदार ने फेसबुक पर कोई आपत्तिजनक बात लिख दी और जिस तरह से उसके विरोध में शहर और थाने फूँक दिए गए उसीसे सबको ये भी पता चल गया कि वो पोस्ट पैगम्बर मुहम्मद साहब के विषय में लिखी गई थी | इस घटना ने कई सारी बातों को प्रमाणित किया | कांग्रेस ही नहीं ,उनके विधायक ही नहीं बल्कि विधायकों के रिश्तेदार तक बावली पूँछ हैं जो राहुल गांधी पर पोस्ट लिखने की बजाय मुहम्मद साहब पर लिख रहे हैं |
फेसबुक और व्हाट्सएप जैसे सोशल नेट्वर्किंग प्लेटफॉर्म ऐसी बातों के लिए एकदम उत्प्रेरक का काम करते हैं , चुप्पे से ऐसी आग लगा देते हैं कि पूरा शहर समाज देश भक्क करके जल उठता है | समाज के तमाम ज़ाहिल इन कामों को करने में सिद्धहस्त हो चुके हैं | टिक टोक जैसे एप्स के बंद हो जाने के बाद तो इनकी कुंठा अपने चरम पर है |
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