हाथरस कांड का भयानक सच – तो क्या लड़की के भाई ने ही की हैं लड़की की हत्या

हाथरस कांड एक दुखद संयोग के साथ किया गया जहरीला प्रयोग है :
अब होता है घटना को बलात्कार से शुरू होकर सामूहिक बलात्कार तक पहुंचा दिया जाने वाले एंगल का प्रवेश।
और तभी नार्को नामक टेस्ट का मामले में प्रवेश होता है और सत्य के लिए किया जाने वाला नार्को अपने होने से पहले ही सत्य उजागर करने की शुरुआत कर देता है :
हाथरस की इस दुखद घटना के कारक :
वापसी में अब तक की सबसे बड़ी बाधा : नार्को टेस्ट का ऐलान।
घटना के असल सत्य, लड़की की मौत के असली दोषियों के सामने आने की राह आसान : उतर प्रदेश सरकार द्वारा हाथरस कांड की सीबीआई जांच का ऐलान।
कुछ लोगों ने मेरी पोस्ट पर कमेंट किया है कि पुलिस ने रात में दाह संस्कार क्यों किया ?
दरअसल गुप्तचर विभाग को यह सूचना मिली थी की लड़की का लाश को अपने कब्जे में लेकर टुकड़े टुकड़े गैंग के लोग बड़े पैमाने पर हिंसा की तैयारी किए थे क्योंकि उन्हें सुबह 9:00 बजे ही लाश दे दी गई थी और एंबुलेंस से लाश हाथरस पहुंचा दी गयी थी
लेकिन परिजन दाह संस्कार नहीं कर रहे थे आखिर वह किस के इंतजार में थे ?
पोस्टमार्टम की गई बॉडी सुबह 9 बजे मिल गयी थी तब रात 10 बजे तक बॉडी किसलिए सड़ाई जा रही थी? हिन्दू धर्म में ये कहाँ लिखा है कि दंगा कराने की नीयत से अंतिम संस्कार न किया जाय और लाश में कीड़े पड़ने दिए जाँय??
बस पुलिस ने घर वालों को अंतिम संस्कार करने के लिए दवाब बनाया इसमें क्या गलत किया? लाश सड़क पर रखकर दंगा करा के दसियों लोग मार दिए जाते, सरकारी और प्राइवेट संपत्ति जला दी जाती तो वो ज्यादा सही होता क्या? पुलिस जबरन राजनीति का शिकार बना दी गई।
मेडिकल रिपोर्ट गलत, फोरेंसिक रिपोर्ट गलत, पोस्टमार्टम रिपोर्ट गलत बस जो पमेरियन पत्रकार कहें वही सही?
पुलिस ने परिजनों के फोन सर्विलांस पर रखे तब पुलिस को पता चला कि कई चैनलों के पत्रकार और कांग्रेसी नेता परिजनों को भड़का रहे थे उन्हें 50 लाख रुपए की लालच दे रहे थे उन्हें कह रहे थे कि दाह संस्कार मत करना हम लाश को लेकर धरना प्रदर्शन करेंगे फिर पुलिस ने जब कुछ और लोगों के फोन सर्विलांस पर रखे तब पता चला कि जिस तरह से दिल्ली में नागरिकता कानून के मुद्दे पर बड़े पैमाने पर हिंसा की गई थी ठीक उसी पैटर्न पर टुकड़े-टुकड़े गैंग हाथरस आगरा मथुरा जैसे शहरों को भी जलाना चाहती थी।
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