झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है, कुछ भी करने को तैयार है. तुष्टीकरण की चासनी में कोई इस कदर डूब सकता है. इसका उदाहरण आपको झारखंड में देखने को मिल जाएगा । ये अंधभक्ति इस स्तर तक पहुंच चुकी है कि अब झारखंड के तकरीबन 35 हजार सरकारी स्कूलों को हरे रंग से रंगने का फरमान झारखंड सरकार ने दिया है . नए आदेश के मुताबिक राज्य के सभी सरकारी और अनुदान प्राप्त स्कूलों को हरे रंग में और उनके दरवाजों को सफेद रंग में रंगने का आदेश जारी किया गया है .

साभार-सोशल मीडिया

झारखंड सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री जगन्नाथ महतो के निर्देश पर स्कूलों के रंग बदले जा रहे हैं। फिलहाल सभी स्कूल भवनों का रंग गुलाबी हैं। वहीं इस पूरे मामले में बीजेपी विधायक भानु प्रताप शाही ने हेमंत सरकार पर हमला करते हुए कहा कि पहले पूरे राज्य में उर्दू को थोपा गया, अब सूबे के सभी स्कूलों को हरा रंग से रंगा जा रहा है । उन्होंने ट्वीट कर कहा कि भाजपा जब भी सरकार में आएगी तो सबको भगवा कर दिया जाएगा .. यहां तक कि पूर्व मुख्यमंत्री और मंत्री के आवास भी….

दरअसल हाल के दिनों में जिस तरह से झारखंड सरकार एक खास समुदाय को खुश करने में जुटी हुई है उसकी वजह से झारखंड में कट्टरपंथियों का दुस्साहस बढ़ता जा रहा है। चाहे हजारीबाग में रुपेश पांडे की ‘मॉब लिचिंग’ हो या फिर रामनवमी जुलूस के दौरान भी राज्य में तनाव और दंगे हो।

वैसे देखा जाए तो झारखंड सरकार का ये तुष्टिकरण वाला प्रेम काफी पुराना है. कुछ दिनों पहले ही झारखंड के विधानसभा में ‘शांतिप्रिय’ समुदाय के नमाज अदा करने के लिए विशेष कमरा आवंटित किया गया था. इस आदेश के बाद राज्य सरकार की खूब किरकिरी हुई थी.

 

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