इमरान -बाजवा की हुई लड़ाई :पाकिस्तान की शामत आई

चलिए तो देर सवेर वो खबर भी सुनने को मिल ही गई जिसका अंदेशा पिछले जताया जा रहा था | असल में पाकिस्तान की पूरी इकोनामी ,यानी इमरान खान से लेकर त्यौहार का खच्चर तक , सिर्फ भारत में अपनी आतंक का गोडाउन खोल कर दाना पानी चलाते आ रहे थे | अब न पत्तरबाजी वाली रेहड़ी चल रही है और न ही आतंक की दुकान तो पाकिस्तान की सेना और पुलिस आपस में ही एक दूसरे की जिबह कर रहे हैं
फिर आ गई मोदी सरकार , युद्ध नीति में पारंगत डोभाल और इसके बाद शुरू की गई कायदे से पाकिस्तान की ठुकाई | फ़ौज ातनाकियों को दोज़ख में व्हाट्सएप ग्रुप बनवा रही थी तो पुलिस पैलेट से तशरीफ़ पर कानून के सबक छाप रही थी | न फ़ौज गिन के मार रही थी न ही पुलिस |
पैसे की ऐसे ही फ़रियाद और पाकिस्तानी महिलाओं से समबन्ध की पेशकश चीन के साथ भी की गई | जिसे उसने अपनी शर्तों के साथ मान लिया है | भारतीय खवातीनों ने भी इस बात को लेकर काफी गुस्सा जताया है | एक अन्य क्रिकेटर ने IPL पाकिस्तानी खिलाड़ियों को नहीं खिलाने को लेकर भारत पर उन्हें भुखमरी की हालत से नहीं निकालने का आरोप भी लगाया था |
अब यहां पुलिस और फ़ौज के बीच जूतमपैजार की ख़बरें निकल कर सामने आ रही हैं | lockdown ने भिखमंगे पाकिस्तान को कंगाल और दीवालिया बना दिया | कहीं से भी पैसे की मदद न मिलती देख पाकिस्तान में कराची शहर में पाकिस्तानी पुलिस ने “नियाजी वापस जाओ और बाजवा वापस जाओ ” के नारेबाजी के बीच पाक फ़ौज के विरूद्ध मोर्चा खोल दिया |
इसको देख कर डी एस पी भूरे सिंह का कहना है :-
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