कट्टरता की हद अगर सर चढ़कर बोलने लगे तो मनुष्यता और क्रूरता में कोई फर्क नहीं रह जाता है। डॉ नारंग और अंकित सक्सेना के साथ दिल्ली में जो हुआ था वैसा ही किस्सा 18 वर्षीय राहुल राजपूत के साथ हुआ है। दिल्ली के आदर्श नगर में रहने वाली राहुल की 5 मुस्लिम युवकों द्वारा हत्या कर दी गई क्योंकि राहुल उनकी बहन से बात करता था। राहुल डीयू में ओपन का छात्र था और इंग्लिश का ट्यूशन पढ़ा कर अपना गुजारा करता था। जहांगीरपुरी में रहने वाली मुस्लिम लड़की से वो पिछले कई दिनों से सम्पर्क में था जिसके चलते लड़की के भाई ने इस दोस्ती पर नाराजगी जताई थी। मोहम्मद अफ़रोज़, मोहम्मद राज समेत तीन अन्य मुस्लिम युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।


सवाल उठता है कि अंकित सक्सेना , डॉ नारंग और राहुल की हत्या पर न देश और ना दिल्ली में कोई बवाल होता है ना आवाजें उठती हैं , ना कैंडल मार्च निकलते हैं मगर यही हादसा किसी दूसरे मज़हब वाले के साथ हो जाता तो भारत देश के अस्तित्व को खतरे में बताया जाने लगता। पुलिस के मुताबिक इस मामले में 3 नाबालिग समेत 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। राहुल अपने परिवार में इकलौता लड़का था , उसके परिवार में अब उसके पिता, मां और छोटी बहन हैं। परिवार वालों के मुताबिक सोची समझी साजिश के तहत इस वारदात को अंजाम दिया गया है, आरोपी युवकों ने राहुल के चचेरे भाई को फोन कर राहुल को कोचिंग सिलसिले में झूठ के सहारे बाहर बुलाया और बाद में पीट पीट कर उसकी हत्या कर दी।

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