रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र स्थित चिल्ड्रेन होम में एक सात साल की आदिवासी बच्ची के साथ यौन हिंसा की शर्मनाक खबर सामने आयी है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ये शेल्टर होम किसी रसूखदार और पूर्व नौकरशाह से जुड़े शख्स का है. जिस वजह से मामले को दबाने की लगातार कोशिश की जा रही है. हालांकि इस बीच मामले की जांच के लिए राष्ट्रीय बाल संरक्षण के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो मंगलवार को रांची पहुंच चुके हैं और पूरे मामले की जानकारी लेने के बाद एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। दरअसल, ये मामला धुर्वा थाना क्षेत्र के कुटे में रेनबो फाउंडेशन इंडिया द्वारा संचालित रेसिडेंशियल हॉस्टल फॉर अर्बन डिप्राइव्ड चिल्ड्रन का है। यहां कूड़ा-कचरा बीनने वाली बच्चियों के रहने, खाने और पढ़ाने की व्यवस्था है।

रांची पहुंचते ही 26 तारीख को उन्होंने इस मामले की जानकारी ट्वीट कर दी जिसमें उन्होंने कहा कि “आज झारखंड के रांची में हूं। यहां एक चिल्ड्रेन होम में बच्चे के साथ स्टाफ़ द्वारा यौन हिंसा व उसके बाद उसको दबाने का मामला प्रकाश में आया है। बालगृह उसी रसूख़दार पूर्व नौकरशाह से ही सम्बंधित संस्था का है जहां बच्चों का उपयोग धरना, प्रदर्शन व अराजक गतिविधियों में करते हैं।”

वहीं उन्होंने अपने अगले ट्वीट में रांची पहुंचने की घटना की बात की। उन्होंने लिखा, “शर्मनाक बात है कि पिछले चार घंटे से झारखंड पुलिस बच्चे के यौन शोषण के संज्ञेय अपराध में भी FIR दर्ज करने के लिए परिजन को फ़रियादी बनाने की ज़िद पर अड़ी है। न तो स्वयं से मुक़दमा बना रही न ही एनसीपीआर को अपना फरियादी बना रही है।” इसके साथ ही राज्य के सीएम हेमंत सोरेन पर तंज कसते हुए प्रियंक कानूनगो ने पूछा कि आखिर किसका दबाव है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक प्रियंक कानूनगो एक सामाजिक कार्यकर्ता की शिकायत पर जांच के लिए रांची पहुंचे हैं. जिसमें बीते 7 अप्रैल को नाबालिग बच्ची के साथ चिल्ड्रेन होम के गार्ड के द्वारा यौन हिंसा की बात सामने आयी है . साथ ही चिल्ड्रेन होम के मैनेजर और सीडब्ल्यूसी द्वारा मामले को छिपाया गया, जो कि पोस्को अधिनियम 19 की उप धारा 2 के तहत दंडनीय अपराध है. इस तरह की शिकायत मिलने के बाद राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने इस पर संज्ञान लिया है.

वहीं इस मामले को लेकर राज्य की हेमंत सरकार अब घिरती जा रही है. झारखंड बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने ट्वीट कर कहा कि यह घटना बेहद शर्मनाक है. महिला, युवा, पिछड़ा वर्ग और अब बच्चे भी शिकार हो चुके हैं इस राज्य सरकार की राजनीति का. ऐसे मामलों की लीपापोती नहीं बल्कि निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा गुनहगारों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.

 

 

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