बीजेपी दक्षिण भारत मे अपने पांव पसारने के लिए लगातार कई सालों से मेहनत कर रही है। कर्नाटक के अलावा अन्य किसी राज्य में बीजेपी को खास सफलता नहीं मिली है, मगर जिस तरह से तेलंगाना में निकाय चुनावों में पार्टी ने 4 से 40 तक का सफर तय किया है, उससे पार्टी नेतृत्व की आंखों में चमक आई है।


बेशक तेलंगाना में बीजेपी सबसे बड़ा दल नहीं बन पाई है मगर राज्य में TRS के जवाब के तौर पर पार्टी ने खुद को विपक्ष में खड़ा करने की हिम्मत दिखाई है। जिस तरह से हैदराबाद निगम नतीजो में पार्टी को बड़ी छलांग हासिल हुई है , उस तरह से पार्टी अब अगले विधानसभा चुनावों में खुद को बड़े तौर पर पेश करने की रणनीति बनाएगी। राज्य में बीजेपी बड़े विपक्षी दल के तौर पर उभरी है और 2023 विधानसभा चुनावों में खुद को बड़े लेवल पर पेश करने जा रही है।


तेलंगाना और हैदराबाद बीजेपी के लिए कितना अहम है इसका अंदाजा इसी बात से लग सकता है कि पार्टी ने लगभग हर शीर्ष नेता को इस नगर निगम चुनाव में उतारा दूसरी ओर कांग्रेस का एक भी नेता पार्टी के लिए मेहनत करता नहीं दिखा।


बीजेपी के लिए तेलंगाना कितना अहम है इसका सबूत इसी बात से लगता है कि नतीजों के फौरन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना प्रमुख बांदी संजय से फोन पर बातचीत की। बांदी संजय निगम पार्षद से सांसद बने हैं और पार्टी के प्रदेश प्रभारी हैं। बीजेपी की यही तैयारियां दिखाती है कि बीजेपी तेलंगाना को अपने लिए रणनीतिक तौर पर कितना अहम मानकर चल रही है।

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