The Battle of Chatra
(Between Company forces and Indian rebel sepoys 02 Oct 1857)

02 Octoberआमतौर पर गाँधी जयंती के लिये जाना जाता रहा है। पर 02 October 1857 के ही दिन झारखंड के चतरा शहर में एक भयंकर युद्ध हुआ था, जो Battle of Chatra के रुप में इतिहास में दर्ज है।

         सन् 1857 में उत्तर एवं पूर्व भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ भयंकर विद्रोह हुआ। बिहार के शाहाबाद में कुँवर सिंह ने अँग्रेजों के छक्के छुड़ाये हुये थे 30 July 1857 छोटानागपुर के प्रभारी कमिश्नर Col. E T Dalton को उनके रसोईये ने बताया कि पलटन में बगावत की बातें हो रही हैं। Dalton सकते में आ गया, इससे पहले कि वो कुछ कर पाता खबर आई कि 8th Native Infantry की Ramgarh Battalion ने हज़ारीबाग़ में बग़ावत कर दी है, और कोषागार को लूट लिया, जेल तोड़कर सभी कैदियों को रिहा कर दिया, अँग्रेजों के बंगले जला दिये।
         Dalton ने Lt Graham को 30 सवार और Native Infantry की Ramgarh Battalion की 2 कंपनियों को 2 तोप के साथ हजारीबाग भेजा। रामगढ़ पहुँचते ही इस टुकड़ी ने भी विद्रोह कर दिया, Graham जैसे तैसे प्राण बचा कर भाग गया। और जमादार माधो सिंह एवं सूबेदार नादिर अली खा़न की कमान में ये टुकड़ी वापस राँची लौट आई।    
         2 August 1857 को इनके आने की खबर सुन कर Col Dalton, Col Robbins, Lt Reeves, Lt Birch और उनके Sergeant Major छावनी छोड़कर भाग निकले, Capt Oakes और Capt  Davies पहले से ही पिठौरिया में इनका इंतज़ार कर रहे थे, यहाँ से सभी हज़ारीबाग़ के लिये चल पड़े, क्योंकि खबर मिल चुकी थी कि सारे विद्रोही हज़ारीबाग़ से जा चुके थे।
         दोपहर चार बजे के करीब सूबेदार नादिर अली और साथी वापस राँची आ गये। इन्होंने अँग्रेजों के घर जला डाले, आज के मेन रोड स्थित GEL Church पर भी गोले दाग़े ( निशान आज भी देखे जा सकते हैं see  picture of the GEL Church)। यहाँ पर इन्होंन सारे सरकारी भवनों पर कब्जा कर लिया, एक समानांतर शासन स्थापित कर दिया और ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव को अपना शासक घोषित कर दिया।
 ये 11 September 1857 तक राँची पर काबिज रहे, फिर कुँवर सिंह की फौज का साथ देने के लिये निकल पड़े। चूँकि GT Road पर Rattray’s Sikhs का पहरा था, ये लोग बालूमाथ के रास्ते निकले।  

        उधर Col Dalton ने हज़ारीबाग़ फिर से संभाल लिया। 21 September  को Dalton को विद्रोहियों के बालूमाथ में होने की ख़बर मिली। Dalton ने अनुमान लगा लिया कि विद्रोही सैनिक चतरा जायेंगे, और अपने आला अधिकारियों से और मदद की अपील करता रहा। विद्रोहियों का रास्ता रोकने की मंशा से Col Dalton बगोदर और बरही में खेमा डाले रहा। अंततः  22 september 1857 को राँची लौट आया।              

         इधर लगभग 3000 की संख्या में विद्रोही सैनिक चतरा पहुँच कर लूटपाट मचाने लगे, जिससे उनके चतरा में छुपे होने की पुष्टि हो गयी।                              
        02 October 1857 की सुबह Maj English, 53rd Foot के 180 सैनिकों और 45th Rattray’s Sikhs (45th Rattray’s Sikhs आज की 3rd Battalion Sikh Regiment है) के 150 सैनिकों के साथ चतरा पहुँचा। 3000 विद्रोही चतरा जेल के निकट एक टीले पर सूबेदार जय मंगल पांडे और सूबेदार नादिर अली ख़ान की कमान में मोर्चा बनाये हुये थे। उनकी चार तोपें सामने की संकरी गली पर निशाना लगाये बैठी थीं। जब Major English की फौज इस रास्ते से आगे बढ़ी तो तोपों ने उन पर कहर ढा दिया, भारी संख्या में सैनिक हताहत हुये।

        तब Lt J C C Daunt ( वैसे Daunt का शाब्दिक अर्थ ‘डर’ है ) ने अदम्य साहस का परिचय देते हुये पीछे की ओर से टीले पर चढाई की और अकेले ही तोपों पर कब्जा कर लिया। जब तोपें शांत हो गयीं तो विद्रोही, कंपनी की फौज के सामने टिक नहीं पाये, और लगभग एक घंटे के संघर्ष के बाद भागने लगे।              
 लेकिन तब तक उन्होंने कंपनी फौज के 56 लोग मार गिराये थे। जिन्में 46 अँग्रेज और 10 सिख थे, विद्रोही सैनिकों में से भी करीब 150 मारे गये।    

       जमादार माधो सिंह भागने में सफल रहे, जबकि सूबेदार जय मंगल पांडे और सूबेदार नादिर अली खा़न को मुखबिरों की मदद से 03 October 1857 को पकड़ लिया गया, इसी दिन दोनों को Maj Simpson की अदालत में पेश किया गया, और 1857 की Mutiny Act की धारा 17 के मुताबिक फाँसी की सज़ा सुनाई गई।

       04 October 1857 को दोनों सूबेदारों को हरजीवन तालाब के बगल में, वही जगह जहाँ दो दिन पहले युद्ध हुआ था, फाँसी दे दी गई, और इनके और बाकी सैनिकों के शवों को अँग्रेजों ने पास के आम के पेड़ों से लटका दिया।                    
       Lt Daunt और Sgt Dynon को इस युद्ध में इनके साहस के लिये Victoria Cross से सम्मानित किया गया.

जबकि सूबेदार जय मंगल पांडे और सूबेदार नादिर अली खा़न की शहादत सरकारी उदासीनता का शिकार रही है

 चित्र (नीचे से ऊपर )
1 & 2.शहीद स्तंभ
3.  शिलापट्ट
4.  GEL Church Main Road Ranchi (नीले घेरे में फँसा हुआ गोला )



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