जिस प्रकार मकड़ी अपना जाल अपने ही शरीर से  खुद बुनती है और निगल जाती है .

जैसे धरती से औषधि निकलती है जैसे जीवित मनुष्य से केश एवं रोम उत्त्पन्य होते है

येसे  ही  ब्रह्मा से से दुनिया चलती है .

ब्रह्मा जी  ने तो अपना काम किया अब आगे का काम महामनुस्य द्वारा किया जाना था उनसे से एक है जो

4 मुख नही रखते है किन्तु धरती पे एक ब्रह्मा जी है ……

उनके केवल 2 हाथ है किन्तु वो एक विष्णु जी है .

उनके पास तीसरा नेत्र नही है फिर भी वो एक और शिव है ………..

उनका नाम भगवान् बेद ब्यास जी है ……

वैसे तो सनातन और धरती के कल्याण के लिए उनके कार्य शब्दों में लिखना किसी मानव द्वारा सम्भव तो नही है बस एक छोटी से कोसिस है एसे महापुरुष धरती पे भगवान के रूप को सभी सनातनी कुछ  इनके बारे में जान सके

कृष्णद्वैपायन यानी ब्यास जी ने पुरे बैदिक वाग्मंग को 4 हिस्से में बाटा क्युकी सम्पूर्ण वाग्मंग कंटस्थ करना बहुत ही मुस्किल कार्य था

यदपि उस ज़माने में लेखन कार्य नही फिर भीब्यास जी ने  धर्मं का प्रचार प्रसार जानकरी के लिए इसे मौखिक 4 हिस्से में बाटा

और अपने 4 प्रमुख शिष्य को अलग 4  बेद की जानकरी दी ..

ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद

क्युकी  कृष्णद्वैपायन ने वेदों को बाटा इसलिए इनका नाम बेद ब्यास पड़ा .

एक बार उनके पत्नी अरुनि ने पूछा आज आपको नीद नही आया रही क्या ?

उन्होंने जवाब दिया मै तो सो चुका अरुनि मेरे विचार जाग रहे है ……..!.

जब उपनिसद को कोई समझ नही पा रहा था तो उन्होंने  सारे उपनिसद  को एक में पिरो के एक सुत्र्य बनाया जिसका नाम  ब्रह्म सुत्र्य रखा …….

जीवन में ब्यास जी कभी रुके नही …………………….

उन्होंने पुराणों का संकलित करने का ….कार्य किया और 18  पुराणों की रचना की

  1. ब्रह्म पुराण
  2. पद्म पुराण
  3. विष्णु पुराण
  4. वायु पुराण — (शिव पुराण)
  5. भागवत पुराण — (देवीभागवत पुराण)
  6. नारद पुराण
  7. मार्कण्डेय पुराण
  8. अग्नि पुराण
  9. भविष्य पुराण
  10. ब्रह्म वैवर्त पुराण
  11. लिङ्ग पुराण
  12. वाराह पुराण
  13. स्कन्द पुराण
  14. वामन पुराण
  15. कूर्म पुराण
  16. मत्स्य पुराण
  17. गरुड़ पुराण
  18. ब्रह्माण्ड पुराण

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास महाभारत ग्रंथ के रचयिता थे। महाभारत ग्रंथ का लेखन भगवान् गणेश ने महर्षि वेदव्यास से सुन सुनकर किया था। महाभारत में 1 लाख श्लोक है .……..

एक हास्य बात इसमें यह की  भगवान गणेश जी ने कहा था जब तक आप बोलेंगे तब तक ही मै लिखना आप चुप हुए तो मै छोड़ देना तो ब्यास जी ने बोला मंजूर है और जब ब्यास जी को आराम करना होता तो वो कुछ एसा शब्द बोल देते की गणेश जी सोचे उतने में वो विश्राम कर लेते  थे !!



 

 

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