‘सेक्युलरिजम की आड में हमास का समर्थन’ इस विषय पर विशेष संवाद !

‘भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध के आवाहन को कुटनीति का उपयोग कर एक संधि में रूपांतर किया । उसीप्रकार वर्तमान में इसरायल पर हमास द्वारा किए आक्रमण का बोध लेकर भारत को राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से प्रत्येक कदम उठाना आवश्यक है’, ऐसा प्रतिपादन युद्ध सेवा मेडल प्राप्त ब्रिगेडियर हेमंत महाजन ने किया । वे हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा आयोजित ‘सेक्युलरिजम की आड में हमास का समर्थन’ इस विषय पर विशेष संवाद में बोल रहे थे ।
इस अवसर पर ब्रिगेडियर हेमंत महाजन आगे बोले, ‘7/10 को आतंकवादी संगठन हमास का इसरायल पर आक्रमण करना, यह इसरायल की विश्वभर प्रसिद्ध गुप्तचर संगठन ‘मोसाद’ की बडी असफलता है । इसरायल के गुप्तचर क्षेत्र में तांत्रिक बातों पर अधिक जोर दिया है और मानवी गुप्तचर क्षेत्र की अनदेखी की । गाजा पट्टी से इसरायल में प्रतिदिन काम के लिए आनेवाले 15  से 20 हजार नागरिकों ने 2 से 3 वर्ष हमास के लिए गुप्तचरों के रूप में काम किया । इसरायल की युद्ध के लिए तैयारी नहीं है, यह ध्यान में आने पर हमास ने आक्रमण किया । इसरायल के उच्च तंत्रज्ञान पर आधारित ‘आयर्न डोम’ यंत्रणा को हमास के अल्प तंत्रज्ञान ने पराभूत किया । इसरायल का शहरीकरण होने से वहां के नागरिकों की लडने की क्षमता अल्प हो गई है । इसरायल ने अपने शत्रु को कम लेखा है । शत्रु का उद्देश्य समझकर नहीं लिया और इसरायल के लोग आपस में लडते रहे । इसरायल की इन सभी चूकों से भारत को बहुत कुछ सीखने जैसा है । भारतीयों में राष्ट्रभक्ति निर्माण करना और वीर सावरकर की सीख के अनुसार कठिन परिस्थिति का सामना करने की नागरिकों में तैयारी निर्माण करनी चाहिए ।’
इस अवसर पर सेनादल के सेवानिवृत्त मेजर सरस त्रिपाठी ने कहा, ‘भारत को पाकिस्तान, चीन जैसे विदेशी शत्रुओं के साथ ही देशाअंतर्गत कार्यरत नक्सलवादी, पाकसमर्थक, आतंकवादी आदि देशविरोधी शक्तियों के विरोध में लडना चाहिए । यह जग ‘डिप्लोमसी’पर चलता है । जिसका जैसा बर्ताव है, उस अनुसार ही उससे बर्ताव करना चाहिए । जिन्होंने भारत के दो टुकडे किए, उन्हें भारत में आज विशेषाधिकार दिया जा रहा है । इसलिए कुछ कानून बदलने चाहिए । अच्छे कानून बनाने चाहिए । हिन्दू धर्म मानवतावादी है; परंतु आतंकवाद का समर्थन नहीं किया जा सकता । हमास एक राक्षसी संगठन है और इसरायल को उसे समाप्त करना चाहिए । हिन्दुओं के देवी-देवताओं के हाथों में भी शस्त्र हैं । इसके लिए प्रत्येक हिन्दू को आत्मरक्षा के लिए सरकारमान्य शस्त्र रखने चाहिए ।
श्री. रमेश शिंदे, राष्ट्रीय प्रवक्ता, हिन्दू जनजागृति समिति.

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