आज पूरा देश कोरोना से मजबूती से लड़ रहा हैं , पिछले 24 घंटे में सबसे ज़्यादा 7,546 कोरोना केस भारत की राजधानी दिल्ली से आये हैं धीरे धीरे दिल्ली भारत की कोरोना कैपिटल बन गई हैं , और अरविन्द केजरीवाल की दिल्ली सरकार टेलीविज़न पर प्रचार प्रसार कर रही हैं I

दिल्ली: 19 नवंबर 2020 को कोरोना संक्रमित विवरण

दिल्ली में पहला कोरोना संक्रमित 2 मार्च 2020 को मिला और उसके बाद यह रफ़्तार रुकने का नाम नहीं ले रही I

  • 2 मार्च 2020 : कोरोना का पहला मामला
  • 2 अप्रैल 2020 : 141 कोरोना के मामले
  • 2 मई 2020 : 384 कोरोना के मामले
  • 2 जून 2020 : 1298 कोरोना के मामले
  • 2 जुलाई 2020 : 2373 कोरोना के मामले
  • 2 अगस्त 2020 : 961 कोरोना के मामले
  • 2 सितम्बर 2020 : 2509 कोरोना के मामले
  • 2 अक्टूबर 2020 : 2920 कोरोना के मामले
  • 2 नवंबर 2020 : 4001 कोरोना के मामले
  • 19 नवंबर 2020 : 7546 कोरोना के मामले

कोरोना संक्रमण की यह बढ़ती संख्या वास्तव में चिंताजनक हैं ,सामन्य किसी देश की राजधानी का यह हाल हैं तो देश के अन्य राज्यों का क्या हाल होगा लेकिन भारत में उल्टा हैं सबसे बुरा हाल राजधानी का ही हैं और वहाँ की केजरीवाल सरकार इल्जाम लगाने के सिवाए ज्यादा कुछ कर नहीं रहीं I चलिए शुरू से शुरू करते है :- जब शुरुवाती 4 महीने जब केंद्र सरकार ने लॉकडाउन भी लगाया था , तब अरविन्द केजरीवाल क्या कर रहे थे :-

मई 25 अरविन्द केजरीवाल लाइव कॉन्फ्रेंस

25 मई की वीडियो कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल जी ने कहा – “स्थति नियंत्रण में हैं और घबराने की कोई बात नहीं हैं ” , जबकि 25 मई को 635 कोरोना संक्रमित मिले थे जो उस वक़्त के सबसे ज्यादा संक्रमित थे I और इसके 3 दिन बाद यानी 28 मई को यह संख्या 1000+ हो गई I

जून में जब कोरोना जब तेज़ी से बढ़ रहा था तब केजरीवाल जी कुछ इस प्रकार ट्विटर पर छाए हुए थे I

इसके बाद जून में कोरोना तेज़ी से बढ़ रहा था और माननीय गृहमंत्री जी ने कमान संभाली , 15 जून को गृहमंत्री ने कोरोना को देखते हुए बैठक बुलाई :-

बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए और तब लगा की सरकार कुछ कर रही हैं , कई कोरोना देखभाल केंद्र खोले गए , मरीजों के लिए बेड और गहन चिकित्सा केन्द्र (आईसीयू) की संख्या बढ़ाई गई I

क्रेडिट लेने के तड़प में केजरीवाल जी ने स्वयं अमित शाह जी को उसी स्वास्थ्य केंद्र का निरिक्षण करने का न्योता दे दिया जिसको बनाने का फैसला स्वयं गृहमंत्री ने बैठक में लिया था I इसका जवाब देते हुए गृहमंत्री ने कहा :-

उसके बाद हालात सामान्य होने लगे और केजरीवाल सरकार ने उसका सारा क्रेडिट खुद लेकर उसका बहुत प्रचार प्रसार किया I जुलाई – अगस्त में हालात सामान्य थे और अगर केजरीवाल सरकार देखभाल अच्छे से करती तो हालात सामान्य ही रहते लेकिन केजरीवाल सरकार ने इससे महत्वपूर्ण प्रचार करना समझा और दो महीने के बाद एक बार फिर सितम्बर में कोरोना पहले से ज्यादा तेजी से बढ़ना शुरू हुआ , अगर सितम्बर में दिवाली होती तो शायद इसका सारा आरोप दिवाली पर डाल दिया जाता लेकिन उस समय केजरीवाल जी पिंकी को जन्मदिन की बधाईया दे रहे थे और प्रचार तो हैं ही I

21 सितम्बर जब कोरोना के 2548 मरीज दिल्ली में एक दिन में पाए जा रहे थे I
18 सितम्बर जब कोरोना के 4127 मरीज दिल्ली में एक दिन में पाए जा रहे थे I

इसके बाद संक्रमण तेज़ी बढ़ रहा था और केजरीवाल सरकार आँखें मूंद कर इसे ऐसे नज़रअंदाज़ कर रहीं थी मानो नज़रअंदाज़ करने से ये परेशानी दूर हो जायेगी , जब नवंबर तक दिल्ली कोरोना कैपिटल बन गया तब केंद्रीय सरकार को एक बार पुनः दिल्ली कोरोना के ऊपर लगाम लगाने के लिए बैठक बुलाई और दुबारा आवश्यक निर्णय लिए गए I

नवंबर 15 को गृहमंत्री ने बैठक बुलाई

दिल्ली के लोगों को यह जानने का अधिकार हैं के वास्तव में उनके लिए इस महामारी में काम कर रहे हैं , और कौन मुफ्त में इन सब का क्रेडिट लूट रहे हैं I

केजरीवाल सरकार प्रचार प्रसार में जितना पैसा खर्च कराती है अगर उसका आधा भी स्वास्थ्य उपकरण खरीदने में लगाती तो शायद आज देश की राजधानी इस प्रकार महामारी से नहीं झूझ रही होती , अगर प्रचार की जगह पैसा प्रदूष्ण को नियंत्रण करने में लगाती तो आज दिवाली पर आतिशबाज़ी के धुएं की में अपनी नाकामी नहीं छुपानी पड़ती I प्रचार में खर्च पैसे का आंकड़ा देखे तो देखते रह जाए I

प्रचार में खर्च हुए पैसे का आंकड़ा

इन सब के मध्य कई बार उच्च न्यायालय द्वारा फटकार लगाईं गयी :-

इन सब के बाद दिल्ली की सोयी हुई केजरीवाल सरकार को सिर्फ इतना ही कहना चाहूंगा – या तो नींद से उठ जाओ या कुर्सी से !!

लोगो को बेवकूफ बना कर क्रेडिट सारे लूट रहा हूँ,
देश की राजधानी को मुफ्तखोरी के ज़हर में झंझोल रहा हूँ ,
लापरवाही कर कोरोना के लिए सारे रस्ते खोल रहा हूँ,
हेलो, मैं अरविन्द केजरीवाल बोल रहा हूँ !!
                            

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