शशशश…..सिर्फ एक हिन्दू ही तो मरा है : “डर का माहौल” नहीं है

बड़े बड़े दंगे फसाद , जुलूस , फतवे , प्रदर्शन ,बैनर , पोस्टर निकल रहे होते . पुरस्कार वापसी से लेकर असहिष्णुता वाली मुहिम चलाई जा रही होती . प्लेकार्ड से लेकर टूलकिट तक मुहैया कराई जा रही होती .
बीबीसी से लेकर मैग्सेसे पुरस्कार वाले टीवी चैनल अपनी नीयत की तरह स्क्रीन काली करके अभी तक मोदी और शाह को ही हत्यारा साबित कर चुके होते और ये साबित कर चुके होते कि , इस देश में ‘विशेष शांतिदूतों ” के लिए डर का कितना विकट माहौल है .
पाकिस्तान और कांग्रेस . जैसे भारत के हितैषी एक सुर में अपने खेमे और जमात को बचाने के लिए एक अमेरिका ,ब्रिटेन और संयुक्त राष्ट्र को बता रहे होते की देखो भारत में हिन्दू कितना जुल्मो सितम ढा रहे हैं . यूँ खुलेआम जय श्री राम बोल रहे हैं ये तो पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़े खतरे की बात है . खासकर उस विशेष दुनिया के लिए जिसे सिर्फ जेहाद के सिवा किसी बात से लेना देना नहीं है .
लेकिन फिलहाल ये सब कुछ नहीं होगा -क्योंकि सिर्फ एक हिन्दू युवक की ही तो हत्या हुई है , इसलिए डर का माहौल नहीं है .
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