TMC छोड़ते हुए ममता को आईना दिखा रहे हैं ,उनके खुद की पार्टी के लोग

जिस तरह रोजाना दूसरी राजनीतिक पार्टियों से मोहभंग होकर सभी का वर्तमान में सबसे बेहतर विकल्प -भारतीय जनता पार्टी में पदार्पण हो रहा है देर सवेर अन्य दलों के चुनिंदा अगुआओं और उनके पारिवारिक क्षत्रपों को छोड़कर शायद ही तीसरा कोई उस राजनीतिक दल के समर्थन में दिखे .
पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले का परिदृश्य तो इतना अजीबोगरीब , हालाँकि अप्रत्याशित नहीं , हो गया है कि लगता है बस किसी सुबह ये खबर न मिले कि खुद ममता बनर्जी भी भाजपा में शामिल हो गई हैं . सबसे कमाल तो ये है कि जो भी तृणमूल को त्याग कर अलग हो रहे हैं वो पार्टी और पार्टी नेतृत्व की सारी कलई खोल रहे हैं .
ऐसा अमूमन तौर पर तभी होता है कि पार्टी से विधायक के टिकट का निर्णय होने के वाद , कोई उस टिकट और पार्टी को त्याग कर सामने वाले खेमे में चला जाए , और इसलिए होता है कि जब किए कराए गए अपराधों की सज़ा तय होने का वक्त आ पहुँचता है तो फिर यूँ ही सब छिटक कर अलग होने लगते हैं .
ममता यूँ तो इससे पूर्व भी अपने सार्वजनिक संबोधनों में एक गुस्सैल , बड़बोली , कई बार बदजुबान भी दिखती रही हैं किंतु पिछले कुछ समय में प्रदेश में सनातन और भारतीय जनता पार्टी के बढ़ते हुए मतदाताओं की ताकत से दिखती अपनी संभावित हार को देखते हुए अब एक खीजभरा अपरिपक्व व्यवहार कर रही हैं
प्रदेश में बार बार कानून व्यवस्था पर उठते सवालों को सिरे से नकारती ममता आज खुद अपने द्वारा चुने हुए अपने लोगों के बीच जब उस क्षेत्र की प्रतिनिधि बनने का दावा ठोंकने गईं वो भी बकौल उनके प्रदेश की दस साल तक लोकप्रिय मुख्यमंत्री रहने के बाद तो कहीं से कुछ लोग आए और सारी सुरक्षा , सभी व्यवस्थाओं , आधिकारियों को धता बताते हए ममता बनर्जी पर गाड़ी चढ़ा कर उनको कुचलने की हिमाकत करके आराम से निकल जाते हैं .
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