मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ का प्रतीक है अमूल, इसलिए हो रहा विरोध

दूध में पानी मिलाकर पीने वाले कुछ गैंगबाज अमूल प्रोडक्ट के बहिष्कार की मुहिम चला रहे हैं। दरअसल जिस तरह लगातार अमूल कम्पनी अपने विज्ञापनों के माध्यम से देश की तरफदारी करती है इससे ‘गैंग विशेष’ के मसीहाओं को मिर्च की जलन महसूस हो रही है। ‘इंडिया टुडे’ के पूर्व इनपुट हेड रहे रिफत जावेद को समस्या है कि अमूल कम्पनी ‘रिपब्लिक भारत’ और ‘सुदर्शन टीवी’ को क्यों विज्ञापन दे रही है?
Time to boycott @Amul_Coop. Its support to Islamophobia is nauseating! The brand is well within its right to sponsor bloodthirsty TV channels, we too are free to boycott Amul. What a fall from grace! #BoycottAmul
— Rifat Jawaid (@RifatJawaid) August 29, 2020
इन्हें समस्या है कि अमूल कम्पनी सर्जिकल स्ट्राइक के समर्थन में विज्ञापन क्यों बनाती है? इस जमात को समस्या है कि अमूल कम्पनी ‘चीनी कम्पनियों’ के बहिष्कार पर विज्ञापन क्यों बनाती है? आखिर ये माइंडसेट क्या कहता है कि जब भी कोई कम्पनी भारत हित की बात करती है ये जमात नाक-मुंह सिकुड़ता हुआ अपने असली रंग में आ जाता है। सोशल मीडिया पर जारी इस ट्रेंड की धज्जियां उड़ाने के लिए भारत की जनता उतर गई है और Amul के समर्थन में Trend चलाकर इस ‘गैंग माफिया’ को मुंहतोड़ जवाब दिया जा रहा है।
Jamaat is pressuring @Amul_Coop to cancel their advertising contract with Sudarshan ..
— Ritu (सत्यसाधक) #EqualRightsForHindus (@RituRathaur) August 29, 2020
This trending Boycott Amul..Hope amul doesn't bow down to this threat!
We live in polarised times & corporates need to make very sane choices!
Boycott can be either way
Respect all customers!
So liberals want to Boycott Amul .
— Naina ?? (@NaIna0806) August 29, 2020
Like Hell !
We love Amul #IndiaLovesAmul #wesupportAmul pic.twitter.com/E4GbvXCiQz
आपको बता दें कि अमूल प्रोडक्ट्स के विरोध के पीछे इन लोगों की मानसिकता में जहर घुला हुआ है क्योंकि यह जानते हैं कि अमूल गुजरात का ब्रांड है और देश के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खासी दिलचस्पी अमूल की सफलता में रही है। प्रधानमंत्री अक्सर अमूल की सफलता के किस्से उद्यमियों को सुनाते रहे हैं और गुजरात का ब्रांड व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष लगाव अमूल से होने के चलते ही अमूल डेयरी प्रोडक्ट के खिलाफ ये लोग मुहिम चला रहे हैं। अमूल से इन्हें नफरत इसलिए है क्योंकि अमूल प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान में मील का पहला पड़ाव है और अभी आगे इस अभियान के लिए लंबी लड़ाई बाकी है। 1946 में बनी अमूल कंपनी गुजरात की लाखों परिवारों को रोजी रोटी कमाने का मौका देती है , अमूल के लिए विशेष तौर पर लाखों महिलाएं प्रतिदिन काम करती हैं और इसलिए अमूल कंपनी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नजरों में विशेष दर्जा रखती है।
DISCLAIMER: The author is solely responsible for the views expressed in this article. The author carries the responsibility for citing and/or licensing of images utilized within the text.