फरवरी में उत्तर पूर्व भारत के राज्य मेघालय में नागरिकता संशोधन कानून के विरुद्ध शुरू हुए किए गए संघर्ष /उपद्रव /हिंसा में लगभग तीन सौ अधिक हिन्दू परिवारों पर अत्याचार और मारपीट ,तथा हिन्दू महिलाओं बच्चों के साथ जबरन किए गए अमानवीय व्यवहार , और उसमें खासी जनजाति के विद्यार्थियों के खासी विद्यार्थी यूनियन के गुंडों के साथ वहां की स्थानीय पुलिस ने जो बर्बरता की थी , उसका संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग एवं राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज़ करवाने की अनुशंसा की |

ज्ञात हो कि 28 फरवरी को , बँगलादेश सीमा से सटे इच्छामति क्षेत्र में , स्थानीय गारो खासी जनजाति और वहां बसे बंगालियों के बीच नागरिकता संसोशधन कानून के समर्थन और विरोध को लेकर संघर्ष शुरू हो गया |स्थानीय खासी जनजाति के लोग वहां की बंगाली हिन्दू बस्तियों में कानून का विरोध करने का दबाव बनाने लगे | इस हिंसा में एक खासी युवक की मौत हो गई |

इसके बाद , खासी विद्यार्थी यूनियन ने स्थानीय पुलिस के साथ मिल कर, हिन्दू परिवारों , महिलाओं बच्चों के साथ वहां हैवानियत का जो नंगा नाच किया उसका सच आत्मा को झिंझोड़ देने वाला है | लगभग 300 से अधिक हिंदू मर्दों को वहां से जबरन मार पीट कर भगाया गया या फिर स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर उन्हें जेल में ठूँस दिया गया |

1 मार्च को मेघायल के इस इच्छामति क्षेत्र में भोलगंज , इच्छामति , कालीबाड़ी ,और कालटेक जैसे गावों में कर्फ्यू लगा दिया गया |

इस दौरान इस सारे क्षेत्र में कुछ स्थानीय पुलिस अधिकारी और अधीक्षक के सांठ गॉंठ में हिन्दू बंगालियों पर किए जाने वाले अत्याचारों ने 300 हिन्दू परिवारों को अपने बीवी बच्चों तक को छोड़ कर भागने पर मजबूर कर दिया | सुदूर क्षेत्र होने के कारण और उस समय दिल्ली सहित देश के बहुत सारे प्रदेशों में हिंसा , दंगे फैले होने के कारण ये खबर समाचारों में दबी रह गई | खासी विद्यार्थी यूनियन और पुलिस ने मिलकर हिन्दुओं के दमन की इस पूरी योजना को अंजाम दिया

Forum for Indigenous Rights- North-East India नामक संस्था ने हिन्दू परिवारों के इन बच्चों और महिलाओं पर हुए अत्याचार और उसमें पुलिस अधिकारियों द्वारा स्थानीय गुंडों को दिया जा रहा संरक्षण ,की शिकायत , महिला एवं बाल कल्याण मंत्री सुश्री स्मृति ईरानी को पत्र लिखा और साथ ही राष्ट्रीय महिला आयोग एवं बाल संरक्षण आयोग ने भी इसका संज्ञान लिया |


OC Shella- Ephriam Ryndong, IC Tyllap- FC Rapsang n OC Sohra- M Rymbai जैसे पुलिस अधिकारीयों को सीधे सीधे हिन्दुओं के प्रति किये गए इस सारे षड्यंत्र हिंसा और अत्याचार के लिए जिम्मेदार ठहराया गया

अब सरकार और सम्बंधित संस्थाओं ने इस पर बड़ी कार्यवाही करते हुए एक IPS अधिकारी को सारे जांच का जिम्मा सौंपते हुए मेघालय सरकार ,पुलिस अधीक्षक , कर्मचारियों को इस सारे प्रकरण पर की गई कार्रवाई रिपोर्ट , पुलिस की भूमिका आदि पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश सुनाया है , और ऐसा नहीं होने / करने की स्थिति में इन सब दोषी पुलिस अधिकारियों /कमर्चारियों के विरुद्ध जे जे एक्ट में FIR दर्ज़ कराने का नोटिस दे दिया है |


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