छठ मतलब-तपस्या
छठ मतलब-त्याग
छठ मतलब-सहनशक्ति
छठ मतलब-संयम
छठ मतलब-प्रेरणा
छठ मतलब-अनुसाशन

ये सब छठ व्रत की मूल व्यायख्या है हमारे सनातन धर्म में शायद ही कुछ ऐसे त्यौहार है जिनको इतनी श्रद्धा से मनाया जाता है|वैसे तो ये त्यौहार कहने को सिर्फ 4 दिन तक चलता है लेकिन इसकी तैयारी में महिनों लग जाते हैं| कुछ दिन पहले से ही संयम रखना पड़ता है चाहे वो संयमता खाने की हो,चलने की हो ,बात करने की हो या किसी को सम्बोधित करने की|क्यूँकि ऐसी मान्यता है की वो हर व्यक्ति या महिला जो इस व्रत को करते हैं उनके अंदर छठी मैया का वास होता है ,रास्ते में चलते हुए भी नीचे देखना पड़ता है की कही किसी के पांव से आपका पैर न छू जाये| त्याग तो इतना है कि बस पूछो मत,साफ़ और सीधे शब्दो में यूं कहें कि एक ऐसा व्रत जो कोई भी कर सकता है ,और मुमकिन है कि आपकी सारी मन्नत पूरी भी हो जाये इतनी आस्था है लोगो के मन में इस व्रत को ले कर की घाट पर हर इंसान व्रतियों के पाँव छू कर आशीर्वाद लेते है| पुराने लोग आज भी बताते हैं हैं कि पहले के जमाने में अगर किसी के पास अक्षमता होती थी इस व्रत को करने में तो लोग उसको यथासंभव मदद कर के बोलते थे इस व्रत को करने में |आज भी लोग सारे रास्ते को साफ़ करते है जिस रास्ते से व्रत करने वाले जाते हैं…

शायद यही सबसे बड़ी खूबसरती है इस सनातन धर्म की जो आपको और कही नहीं मिलेगा|

जय छठी मैया!!

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