मानवाधिकार आयोग या दानवाधिकार आयोग? एमनेस्टी इंटरनेशनल के कथित मानवाधिकार का खुलासा

हमारे देश की संस्कृति मे धर्म सनातन है जहां एक तरफ हम विश्व के सभी चराचर जीव जगत के अधिकारों का सम्मान करते वहीं मानवता विरोधी दानवों को दंड भी दिया जाता। मानवों के अधिकारों की रक्षा हेतु बना आयोग जब दानवों का हितैषी बन जाता तो सनातनी उसे मानवाधिकार आयोग नहीं बल्कि दानवाधिकार आयोग कहते हैं। यहाँ एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे दानवाधिकार आयोग की कोई आवश्यकता नहीं है, इसलिए इन लोगों का यहाँ से चले जाना ही उचित है। इस लेख मे आप जानेंगे:
आप सभी जानते कुछ महीनों पहले खुलासा हुआ था की भारत मे कार्यरत कुछ विदेशी NGO आतंकवादियों को अनुदान दे रही, देशविरोधी तत्वों को उकसा रही एवं धर्म परिवर्तन जैसे समाज विरोधी कार्यों मे लिप्त हैं। इन संस्थाओं को धन देने वाले व्यक्ति भी संदिग्ध हैं एवं ये सभी NGO प्राप्त धन का उपयोग देश विरोधी ताकतों की शक्तियाँ बढ़ाने के लिए व्यय करती हैं। लेकिन विदेशी चंदा (विनियमन) अधिनियम (FCRA) मे नए प्रावधान जुडने से अब इन सभी तथाकथित NGO की मुसीबतें बढ़ गईं, अब ये लोग पहले की तरह स्वच्छंद रूप से काले धन को सफ़ेद कर पाएंगे और ना ही चंदे मे प्राप्त धनराशि का दुरुपयोग। पैसा जिस काम के लिए लिया गया केवल उसी काम के लिए व्यय करना पड़ेगा और इसका पूरा ब्योरा सरकार को देना होगा
वैसे तो FCRA एक्ट वर्ष 1976 मे ही बन गया था, लेकिन उसके प्रावधान काफी लचर थे, कानों मे कई ऐसे छिद्र थे जिसके कारण तथाकथित समाज सेवी कंपनियाँ इस एक्ट का धड़ल्ले से दुरुपयोग करती और मनमाने ढंग से NGO चलाती। ये एक्ट वर्ष 2010 तक ऐसे ही चलता रहा, फिर मनमोहन सिंह ने पहली बार इस एक्ट मे कुछ संशोधन किए। लेकिन वर्ष 2018 मे मोदी सरकार ने फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेग्युलेशन एक्ट (FCRA) मे अभूतपूर्व संशोधन किया, और इसके तहत कोई भी NGO यदि विदेशों से कोई आर्थिक अनुदान लेती है तो FCRA के तहत मंजूरी लेने के लिए कड़े नियम का प्रावधान किया गया। इस संशोधन से अब NGO की कार्यप्रणाली लगभग पूरी तरह से पारदर्शी हो गई है, संक्षेप मे:
इत्यादि और भी कई प्रावधान किए गए हैं। ये अत्यंत हर्ष का विषय है की अब मोदी सरकार ऐसे कानून बना रही है जो उन NGO पर शिकंजा कसेगा जो अपनी दान राशि का उपयोग राष्ट्र विरोधी ताकतों को बढ़ावा देने मे करते। ऐसी ही एक दानवाधिकार समर्थक तथाकथित NGO एमनेस्टी इंटरनेशनल जिसके तार विश्व के तमाम आतंकवादी संगठनों से जुड़े हुए है, वो आज भारत से अपना बोरिया बिस्तर समेट पलायन करने की फिराक मे हैं। जानिए एमनेस्टी इंटरनेशनल पर कौन कौन से संगठनों की सहायता करने का आरोप है:
जैसा की वामपंथियों की आदत है, गुनाह करते रहो, पकड़े गए तो शरीफाई का ढ़ोल पीटो, इसी तर्ज पर जाने से पहले इस संस्था ने भारत सरकार पर निहायत ही बेहूदा आरोप लगा दिये और इस NGO के समर्थन मे मानवाधिकार के बदले दानवाधिकार की दुहाई देने वाले वो तमाम लोग आ गए। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने आरोप लगाया की भारत सरकार मानवाधिकार आयोग समर्थित इस NGO के प्रति बदले की भावना रखती एवं सत्ता की ताकत का दुरुपयोग कर उनकी अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता छीन रहे। अपनी वैबसाइट पर एक ऐसी भ्रामक क्रोनोलोजी बनाई जो ये दर्शाती है की 2014 से ही इस NGO को परेशान किया जा रहा क्यूंकी वो देश के अल्प संख्यकों के हित के लिए लड़ती है। मिथ्या दावों से भरपूर इनके ट्वीट के कुछ ही मिनटों बाद एक ट्वीटर यूजर ने एमनेस्टी इंटरनेशनल की पूरी क्रोनोलोजी की धज्जियां उड़ाते हुए 15 ट्वीट का थ्रेड बनाया जिसमे इन लोगों के एक एक अजेंडे को दुनिया के सामने लाया गया।
NGO के कारनामे स॰ 9
— ? आग्नेय ? #FakeNewsAlert (@agneyaspeaks) September 29, 2020
Amnesty India के हेड आकार पटेल के विचार:
?हिन्दू राष्ट्र के नाम पर मुसलमानों को उकसाना
?हिंसक प्रदर्शन को Activism कहना
?भीड़ एकत्र कर प्रदर्शनों का आवाहन करना
?कश्मीर मुद्दे पर दुनिया को भरमाना
बंगलोर मे इन पर FIR भी दर्ज की गई है। pic.twitter.com/ya7dDnq48P
आप सभी मित्रों से अनुरोध है, इस लेख एवं इस थ्रेड को जरूर पढ़ें और इसे इतना प्रसारित करें ये तथ्य सभी भारतियों तक पहुंचे और लोग एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसी तमाम NGO की असलियत को जानें, मानवाधिकार की बातें करने वाले किस प्रकार दानवाधिकारी बन देश मे नाना प्रकार की समाज विरोधी गतिविधियां चला रहे, इसका पता सभी को चलना जरूरी है।
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