देशभर में किसान आंदोलन के नाम पर विपक्ष जिस तरह से आंदोलन को हवा दे रहा है उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि यह महज एक साझा प्रोपेगेंडा है जिसका सिर्फ और सिर्फ मकसद मोदी विरोध को हवा देना है। जो राहुल गांधी , प्रियंका वाड्रा और सोनिया गांधी मिलकर किसान के नाम पर देश को भड़का रहे हैं उनसे सवाल पूछा जाना चाहिए कि क्या उन्हें पुदीना , धनिया और मेथी-बथुआ में फर्क करना भी आता है जो वह किसान किसान चिल्ला रहे हैं? 


जाहिर है सोने की चम्मच लेकर पैदा हुए प्रियंका वाड्रा और राहुल को न ज़मीन की समझ है और ना जमीनी राजनीति की …यह वो शहजादे है जो आलू से सोना बनाने की बात करते हैं मगर मोदी विरोध के नाम पर अपनी सदबुद्धि के साथ तुष्टिकरण करते हुए उल- जलूल बयानबाजी करते हैं। पंजाब के कुछ व्यापारियों और हरियाणा के खास समुदाय के लोगों को किसान बताकर जिस तरह से प्रोपेगेंडा मीडिया का सहारा लेकर मोदी विरोध की आग को यह लोग भड़काने का काम कर रहे हैं उसे देश की जनता बखूबी समझ रही है। 


प्रियंका वाड्रा और राहुल गांधी ने जितनी बार किसान शब्द का इस्तेमाल अब तक किया है कम से कम उन्हें उतना समय पुदीना, मेथी, धनिया और बथुआ के फर्क को समझने में भी लगाना चाहिए ताकि उन्हें यह जमीनी समझ प्राप्त हो सके कि देश और देश का किसान किस तरह काम करता है।

DISCLAIMER: The author is solely responsible for the views expressed in this article. The author carries the responsibility for citing and/or licensing of images utilized within the text.