हाथ में तिरंगा नहीं उठाऊँगी :चाहे इसके लिए मुझे खुद कितना भी नीचे गिरना पड़े : मेहबूबा

जब ताऊ अब्दुल्ला , चीन चीन अब्बू अब्बू का मचाने लगे हल्ला तो फिर महबूबा ही क्यों पीछे रहे | वैसे भी कुछ न कुछ अंट शंट बोल कर जब राहुल गांधी तक अपनी दुकान चला रहे हैं तो फिर महबूबा क्यों मरहूम रहें बेचारी |
तो महबूबा मुफ्त की ने फ़रमाया है कि चाहे कुछ भी जो जाए तिरंगा अपने हाथों में नहीं उठाऊंगी | मगर काकी ये तिरंगा आपको उठाने के लिए कहा किसने है ?? आप तो सेना फ़ौज पुलिस को मारने और मरवाने के लिए पत्थर ढेले ही उठाओ , यही सूट करता है आपको |
तो सुनिए मुफ्त की मेहबूबा जी , आप तिरंगा उठाइये ,न उठाइये , आप ये सब कहते करते खुद इतना नीचे गिर चुकी हैं कि सबसे पहले आपको खुद को उठाना चाहिए , द्वेष , घृणा और आतंक का बुर्का उतार कर पहले खुद को इंसान बनाना चाहिए क्यूंकि उसके बिना आपको राष्ट्र , देश , राष्ट्रीयता , तिरंगा ,वन्दे मातरम् ये सब तो आपके लिए आउट ऑफ़ सिलेबस है ख़वातीन |
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