ट्विटर का केंद्र सरकार से लगातार तनाव बढ़ता ही जा रहा है । सवाल उठता है कि इस सरकार का इक़बाल क्या रह गया है! ट्विटर ने देश के क़ानून मंत्री और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद का अकाउंट ही एक घंटे के लिए ब्लाक कर दिया। चैनल कार्टून दिखा रहे थे कि सरकार ने ट्विटर के पर क़तर दिये। यहाँ तो उल्टे चिड़िया ने ही चोंच मार दी। रविशंकर जी इस सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री हैं। शर्मनाक और सख़्त क़ाबिले एतराज़ हरकत है ट्विटर की। संसदीय समिति के अध्यक्ष शशि थरूर ने कहा है कि ट्विटर से जवाब माँगा जाएगा।


वक़्त आ गया है कि ट्विटर को बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए, लेकिन सरकार को चाहिए कि सिर्फ़ कड़ी निंदा तक सीमित न रहे। इससे पहलेे भी उपराष्ट्रपतिि वेंकैया नायडू सरसंघचालक मोहन भागवत के issue पर ट्विटर की आलोचना हुुुई है। जनता मांग कर रही है कि डिजिटल इंडिया वाली सरकार को ट्विटर के मुक़ाबले के लिए अपना एक देसी ऐप बनवाना चाहिए ।

आखिर बड़ा सवाल उठता है कि ट्विटर जैसे बड़े प्लेटफार्म और भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश की सरकार के बीच तकरार क्यों चल रहा है। सवाल यह भी उठाया जाना चाहिए कि ट्विटर के पास भारत जैसे बड़े देश की आबादी 125 करोड़ की आबादी का बाजार है, ऐसे में ट्विटर भारत के साथ किस प्रोपेगैंडा के तहत ऐसा बर्ताव कर रहा है।

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