मनुष्य पर अनंत उपकार करने वाले ऋषियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन ! ऋषि पंचमी

ऋषि अथवा मुनि,कहने पर हमारे हाथ अपने आप ही जुड़ जाते हैं और हमारा मस्तक आदर से झुक जाता है, इस भरतखंड में अनेक ऋषियों ने विभिन्न योग मार्ग के अनुसार साधना करके भारत को तपोभूमि बनाया है, उन्होंने धर्म और अध्यात्म विषय पर बहुत लिखा है और समाज में धर्माचरण और साधना इसका प्रसार करके समाज को सुसंस्कृत बनाया है। आज का मनुष्य प्राचीन काल के विभिन्न ऋषियों का वंशज ही है परंतु मनुष्य को उसका भान न रहने के कारण उन्हें ऋषियों के आध्यात्मिक महत्व का ज्ञान नहीं है। साधना करने पर ही ऋषि का महत्व और उनका सामर्थ्य हम समझ सकते हैं। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी, ऋषि पंचमी के नाम से जानी जाती है। इस दिन ऋषियों का पूजन करने हेतु धर्म शास्त्रों में बताया गया है। प्रस्तुत लेख में यह व्रत करने की पद्धति और उसके विषय में अन्य जानकारी देने का प्रयत्न किया गया है उसका पाठकों ने लाभ लेना चाहिए। मनुष्य के संपूर्ण कल्याण के लिए जीवन व्यतीत करने वाले ऋषि मुनियों के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
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