न देश के साथ , न राम के साथ : तुम हो किसके साथ गद्दारों

उन्हें भारत माता की जय कहने से दिक्कत है ,उन्हें वन्दे मातरम् कहने से भी परहेज़ है राष्ट्र गान बजते समय खड़े होने से भी परेशानी है | उन्हें सेना से दिक्कत है , सेना की कार्रवाई से भी दिक्कत है , एयर स्ट्राइक ,सर्जिकल स्ट्राइक से भी मरोड़ उठ जाते हैं उनके पेट में |
उन्हें सरकार से भी दिक्कत है और राष्ट्रवाद से भी , उन्हें क़ानून से भी दिक्कत है और पुलिस से भी समस्या है , प्रशासन और व्यवस्था से भी बहुत परेशानी होती है उनको , उन्हें कागज़ दिखाने से भी बहुत मुश्किल हो जाती है और दिया जलाने से भी ,उन्हें गौ माता से भी नफरत है ,गंगा मैया से भी और भारत माता से भी |
उन्हें महाराणा प्रताप से भी चिढ होती है और छत्रपति शिवाजी महाराज से भी , उन्हें सुभाष को भी नहीं पढ़ना है और भगत सिंह को भी नहीं , उन्हें विवेकानंद से भी कोई मतलब नहीं है और तो और उन्हें प्रभु श्री राम और प्रभु श्री कृष्ण से भी बहुत ज्यादा दिक्कत है |
कौन हो भाई तुम लोग , कहाँ से आए हो और सबसे बड़ी बात आए ही किसलिए हो बे जयचंदों ,गद्दारों | न तुम अमन के होने चाहते हो न वतन के न तुम सरकार के साथ चलना चाहते हो न समाज के | आखिर चाहते क्या हो रे चमन सूतियों ? और जो तुम चाहते रहे हो न अब तक और तुम्हारी उस चाहत को अपना फूफा का गुस्सा समझ कर तुम्हें खुश रखने के लिए जो जितने भी सरमायेदार थे , निपट लिए भाई सब , जो बचे हैं वे भी धीरे धीरे टिक टॉक हो लेंगे |
जो अपने वतन का न हुआ जो अपनों का न हुआ जो राम का न हुआ वो फिर किसी काम न हुआ | ये निर्णायक युग काल है चेत जाओ , सुधर जाओ ,संभल जाओ और आज ,अभी बदल जाओ | कम कहे को ज्यादा समझना हो सके तो हमसे न ही उलझना | जय श्री राम | जय हिन्द | जय भारत
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जयचंद कब किसके हुए.