प्राचीन भारत की कृषि एवं ग्रामीण व्यवस्था

भारत एक अत्यंत समृद्ध देश था। यहाँ की कृषि व ग्रामीण व्यवस्था संसार में सर्वश्रेष्ठ थी। हमारी बैलगाड़ी तक भी चाँदी जड़ी होती थी।...

अखाड़े कब और कैसे बने?

कहा जाता है कि आदि शंकराचार्य ने आठवीं सदी में 13 अखाड़े बनाए थे। इन अखाड़ों का गठन हिंदू धर्म और वैदिक संस्कृति की...

हिन्दू अपनी संस्कृति का खुद नाश कर रहा है।

बहुत ही विचारणीय प्रश्न??? कभी ईद में मुसलमानो को मस्ज़िद के सामने नशा करके अश्लील गानों पर नाचते हुए देखा है क्या ? कभी...

यह सब होता हे हमारे कार्य में।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भक्तिभाव से कैसे मनाएँ एवं उसका महत्व !

पूर्ण अवतार भगवान श्री कृष्ण ने श्रावण माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को पृथ्वी तल पर जन्म लिया। उन्होंने बाल्यकाल से ही अपने...

आस्था – एक विमर्श

दुनिया में कई लोग आस्था को महज धार्मिक चश्मे से देखते हैं लेकिन ये सच नहीं। ऐसा समझना आस्था जैसे एक व्यापक मानवीय गुण...

बैसाखी का ऐतिहासिक महत्व इतिहास !

हमारी सनातन संस्कृति में प्रत्येक पर्व मनाने के पीछे कोई ना कोई विशेष उद्देश्य या कारण होते हैं “। बैसाखी भी एक ऐसा ही त्यौहार...

सर्वशक्तिमान, महापराक्रमी, महाधैर्यवान, सर्वोत्कृष्ट भक्त व महान संगीतज्ञ हैं रामदूत हनुमान

मनोजवम् मारुत तुल्य वेगम् ,जितेंद्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् ॥ वातात्मजं  वानरयूथ मुख्यम ,श्रीराम दूतम शरणं प्रपद्ये ॥ अर्थात् कामदेव व वायु के समान गतिशील, इंद्रियों...

अग्निहोत्र – वायु शुद्धि, देह शुद्धि, मनोशुद्धि तथा ईश्वरोपासना का माध्यम

त्रिकालज्ञानी संतों ने बताया ही है कि भीषण आपातकाल आनेवाला है तथा उसमें संपूर्ण विश्‍व की प्रचंड जनसंख्या नष्ट होनेवाली है । वास्तव में...

विद्या और वाणी की देवी, माँ सरस्वती की उपासना का दिन – वसंत पंचमी

समस्त ऋतुओं के राजा ऋतुराज वसंत के आगमन की आहट बसंत पंचमी के दिन लगती है । यह दिन देवी सरस्वती एवं लक्ष्मी का...

मकर संक्रांति का महत्त्व

भारतीय संस्कृति, प्रकृति और जीवन मूल्यों के साथ बहुत ही सघनता से जुड़ी हुई है और मकर सक्रांति इसका एक अद्भुत उदाहरण है। इस...